लखनऊ: सपा पार्षद को 5 महीने बाद मिला न्याय, हाईकोर्ट ने मेयर के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज कर दिए थे।

वार्ड-73 के सपा प्रत्याशी ललित किशोर तिवारी को पांच महीने की देरी के बाद पार्षद पद की शपथ दिलाई गई। भाजपा पार्षद पर दूसरी शादी छिपाने का आरोप साबित होने के बाद चुनाव रद्द हुआ था, जबकि देरी पर हाईकोर्ट ने मेयर के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज कर दिए थे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड से निर्वाचित घोषित ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद की शपथ दिलाई गई. मेयर सुषमा खर्कवाल ने उन्हें शपथ दिलाई. तिवारी ने दिलीप शुक्ला के नामांकन को कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद शुक्ला का निर्वाचन रद्द हुआ.

देरी का कारण बताते हुए महापौर ने कहा, ‘हमारा कार्यक्रम एक महीने पहले ही तय हो चुका था। अचानक ‘बड़ा मंगल’ के दिन मैं बीमार पड़ गई और मुझे कमांड अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। शनिवार शाम मुझे अस्पताल से छुट्टी मिली और आज हमने ललित किशोर तिवारी को शपथ दिलाई।’

दरअसल, इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ ने 21 मई को महापौर की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों पर तब तक के लिए रोक लगा दी थी, जब तक तिवारी को शपथ नहीं दिला दी जाती।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एस. क्यू. एच. रिज़वी की पीठ ने यह आदेश ललित किशोर तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया था। तिवारी उच्च न्यायालय के वकील होने के साथ-साथ अवध बार एसोसिएशन के महासचिव भी हैं।

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