Who is Jitendra Mishra Ram Mandir CEO ? उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में पहले सीईओ (CEO) की नियुक्ति हो गई है। अब सीईओ के नेतृत्व में ही मंदिर की तमाम व्यवस्था का संचालन होगा। ट्रस्ट के सचिव के निर्देश पर सीओ मंदिर की तमाम गतिविधियों और व्यवस्था का संचालन करेंगे। दरअसल, राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी का मामला सामने आने के बाद से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए थे। भक्तों की आस्था पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। इसके बाद ट्रस्ट ने सीओ की नियुक्ति का निर्णय लिया। करीब 2 महीने चली प्रक्रिया के बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खूब चर्चा में रहे थे। वे भारतीय वायुसेना के वेस्टर्न कमांड के चीफ के पद पर कार्यरत थे। इस पद से वे 30 अप्रैल 2026 को रिटायर हुए थे। अब उन्हें नई जिम्मेदारी मिल गई है।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम सामने आने के बाद हर कोई उनके बारे में जानना चाहता है. जितेंद्र मिश्रा वही जांबाज वायुसेना अधिकारी हैं, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान महज 12 दिनों में मिराज-2000 विमान को लेजर गाइडेड बमों के इस्तेमाल के लिए तैयार करने वाली टीम का नेतृत्व किया था. इस सफलता ने ऑपरेशन सफेद सागर को नकेवल अलग रूख दिया था, बल्कि कारगिल युद्ध की बाजी भी पलट दी थी.
यह कहानी कारगिल युद्ध के दौरान की है. कारगिल की ऊंची और पथरीली चोटियों पर तापमान शून्य से नीचे जा चुका था. पाकिस्तानी घुसपैठियों ने भारतीय सीमा में घुसकर टाइगर हिल, तोलोलिंग और मुंथो ढालो जैसी बेहद अहम चोटियों पर अपने पक्के बंकर बना लिए थे. दुश्मन ऊंचाई पर बैठा था और नीचे से ऊपर की ओर बढ़ रहे भारतीय सेना के जांबाज जवानों को सीधी गोलियों और गोलों का सामना करना पड़ रहा था. हालात बेहद मुश्किल थे, क्योंकि पारंपरिक बमबारी से उन बंकरों को उड़ाना लगभग नामुमकिन साबित हो रहा था.
18 से अधिक तरह के फाइटर जेट उड़ाने का है अनुभव
कारगिल की इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद जितेंद्र मिश्रा का सफर और बुलंदियों की तरफ बढ़ता गया. 3,000 घंटे से ज्यादा वक्त तक आसमान में उड़ान भरने और 18 से ज्यादा अलग-अलग तरह के विमान उड़ाने का बेजोड़ अनुभव रखने वाले मिश्रा ने आगे चलकर ‘एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट’ में चीफ टेस्ट पायलट के तौर पर सेवाएं दीं. वह फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर बने और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ जैसे बड़े पदों तक पहुंचे. उनकी इसी असाधारण लीडरशिप और काबिलियत का नतीजा था कि 1 जनवरी 2025 को उन्होंने एयर मार्शल के रूप में भारतीय वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण ‘वेस्टर्न एयर कमांड’ की कमान संभाली, जो पाकिस्तान और चीन से सटी भारत की पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती है.
ऑपरेशन सिंदूर में संभाली कमान
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान आसमान में कमान संभाली थी। पुलवामा में निर्दोष भारतीयों पर आतंकी हमले के बाद बड़ा एक्शन हुआ था। ऑपरेशन सिंदूर में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ मिला। यह एक खास तरह का सम्मान है जो युद्ध का संचालन करने के लिए दिया जाता है। यह संघर्ष के दौरान बेहतरीन सेवा के लिए देश का सबसे बड़ा सम्मान है। इसका मानक इतना ऊंचा है कि 46 सालों में यह केवल दस बार ही दिया गया है।
अग्निपरीक्षा/चुनौतियाँ:
- मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामलों के बाद वित्तीय पारदर्शिता बहाल करना।
- अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच दर्शन व्यवस्था।
- मंदिर के प्रबंधन को अत्यधिक पेशेवर और अनुशासनबद्ध बनाना।
- नकद चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए नए तकनीकी उपाय लागू करना।
अब नए सीईओ को वायु सेना से मिले प्रशासनिक अनुभव का प्रयोग करते हुए अनुशासन स्थापित करना होगा। उन्हें दानराशि की गणना, वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों में विश्वास, सुरक्षा में संवेदनशीलता और श्रद्धालुओं में आस्था जगाने की आवश्यकता है। राम मंदिर में प्रतिदिन आने वाले एक से डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाना होगा। उन्हें उच्च कोटि की सुविधाएं प्रदान करनी होंगी, जिससे वे रामलला का दर्शन आसानी से कर सकें।
दर्शन पास में वसूली की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, ताकि जरूरतमंद श्रद्धालुओं को निकटता से दर्शन मिल सके। नए सीईओ को रामनगरी के साधु-संतों में भी विश्वास जगाना होगा, जो सीईओ माडल के विरोध में रहे हैं। इसके साथ ही, उन्हें देश के अन्य हिस्सों के संत धर्माचार्यों के लिए भी उच्च कोटि की दर्शन व्यवस्था करने की चुनौती का सामना करना होगा।
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