आदित्य हत्याकांड: 7 साल बाद मिला न्याय, बहन रुचि के त्याग और साहस से जीती गई कानूनी जंग

रायबरेली के चर्चित आदित्य हत्याकांड में लगभग 7 साल का लंबा संघर्ष करने के बाद, स्थानीय अदालत ने 18 अगस्त 2026 को समाजवादी पार्टी के नेता आरपी यादव और ढाबा मालिक सुरेश यादव सहित 14 आरोपियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

इकलौते भाई आदित्य प्रताप सिंह की हत्या के बाद बहन रुचि सिंह ने न्याय के लिए डटकर लड़ाई लड़ी, इस संघर्ष मे उन्होंने अपने भाई के साथ अपने बच्चे को भी खो दिया पर हिम्मत नही हारी। आखिरकार, 629 तारीखों और करीब 7 साल बाद उन्हें न्याय मिल ही गया।

-9 अक्तूबर 2019 को सोमू ढाबा में आदित्य की हत्या।
10-अक्तूबर 2019 को शव गढ़ी खास गांव के पास मिला।
-11 जनवरी 2019 को जिला मुख्यालय में हुआ पोस्टमार्टम।
-25 दिसंबर 2019 को आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल हुआ।
-20 जनवरी 2020 को जिला जज कोर्ट में पहली सुनवाई।
-18 अगस्त 2026 को 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा।


छात्र आदित्य प्रताप सिंह की हत्या 9 अक्टूबर 2019 को हुई थी। यह घटना महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के रतापुर स्तिथ सोमू ढाबा में हुई। उनका शव हरचंदपुर थाना क्षेत्र के गढ़ी ख़ास गांव के पास महराजगंज रोड पर मिला था। जिला जज न्यायालय ने मंगलवार को इस मामले मे फैसला सुनाया।

ढाबे पर चला था प्रशासन का बुलडोजर, आदित्य सिंह हत्याकांड ने प्रदेश की सियासत को भी गर्म कर दिया था। मुख्यमंत्री ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। 16 अक्टूबर 2019 को जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलाने की कार्यवाई की थी। सोमू ढाबा अवैध रूप से बनाया गया था। तत्कालीन डीएम नेहा शर्मा के आदेश के बाद प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम शशांक त्रिपाठी के साथ पुलिस बल ने सोमू ढाबा को ध्वस्त कर दिया था ।


सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव और सोमू ढाबा संचालक सुरेश यादव सहित 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली। 2 दोषियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। आदित्य की हत्या के समय रुचि सिंह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में BA की पढ़ाई कर रही थी। आरोपी रशुखदार और पैसे वाले थे, जिससे परिवार के लिए इंसाफ पाना आसान नहीं था। रुचि ने स्वयं मोर्चा संभाला और भाई को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया। रुचि की शादी आगरा में हुई थी, पर वह न्याय के लिए मायके मे ही रही। बीती 30 जुलाई को न्यायालय को इस मामले मे फैसला सुनाना था। उस समय वह गर्भवती थी और भागदौड़ के चलते बीमार हो गई। अस्पताल मे भर्ती होने के बावजूद गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। उस दिन फैसला टल गया लेकिन रुचि ने हार नही मानी और 18 अगस्त को न्यायालय ने फिर तारीख तय की। फैसला आते ही 14 दोषियों के चेहरे झुक गए। आदित्य की बहन रुचि की आंखों से इंसाफ मिलने की खुशी में आंसू छलक पड़े। इस प्रकरण के शुरूआती दौर में पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शशि शेखर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया था। इसके अतिरिक्त चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया था।

हाईकोर्ट के आदेश पर तेजी से हुई सुनवाई। बहन रुचि के मुताबिक 20 जनवरी को पहली सुनवाई जिला जज कोर्ट में हुई थी। बाद में यह मामला एडीजे प्रथम के यहां भेज दिया गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद तय हुआ था कि जिला जज ही प्रतिदिन मामले की सुनवाई करेंगे। इसके बाद तेजी से मामले की सुनवाई हुई। मामले मे 13 गवाह कोर्ट में पेस हुवे। बीते जुलाई मे डीबीआर को लेकर विवाद हुआ था। इस पर शासकीय अधिवक्ता विवेक सिंह राठौर को हटाकर वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश प्रताप सिंह को इस मामले के लिए विशेष अभियोजक नियुक्त किया गया था।

-रवि शंकर सिंह, संवादाता, रायबरेली

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