रायबरेली के राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) मैदान का नजारा बृहस्पतिवार को आम दिनों से बिल्कुल अलग था। दोपहर डेढ़ बजे का तय वक्त बीत चुका था, पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों का हौसला डिगा नहीं। करीब चार घंटे की देरी के बाद शाम साढ़े पांच बजे जब सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का काफिला मैदान में दाखिल हुआ, तो बारिश और धूप की मार झेल रही जनता का उत्साह देखने लायक था। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवाओं तक ने कुर्सियों और तख्तियों को ही अपनी ढाल बना लिया, लेकिन कोई मैदान छोड़कर नहीं गया। पौन घंटे के अपने भाषण में अखिलेश ने न केवल कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा, बल्कि उत्तर प्रदेश की भावी राजनीति का नया खाका भी खींच दिया।

1. ‘मैं’ की जगह ‘हम’: कांग्रेस संग नए समीकरण की मुनादी
इस रैली का सबसे बड़ा सियासी संदेश मंच की भाषा में छिपा था। अखिलेश यादव ने अपनी पूरी तकरीर में पहली बार खुद के बजाय ‘हम’ शब्द पर जोर दिया। बिना नाम लिए उन्होंने साफ कर दिया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का साथ मिलकर मैदान में उतरना तय है। हाल ही में रायबरेली आए राहुल गांधी से सपा नेताओं की मुलाकात के बाद से ही जिस केमिस्ट्री की चर्चा थी, उस पर अखिलेश ने मोहर लगा दी। उन्होंने स्पष्ट कहा:
“हमारी लड़ाई सीटों के आंकड़े जुटाने की नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की जीत सुनिश्चित करने की है। हम इस मुकाम को हासिल करने के लिए एक साथ कदम बढ़ाएंगे।”

2. ‘पीड़ित बनाम प्रताड़क’: 2027 के लिए नए दौर का अंकगणित
अखिलेश ने सत्तारूढ़ दल पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में अब लकीर साफ खिंच चुकी है—एक तरफ सत्ता के सताए हुए आम लोग हैं और दूसरी तरफ उत्पीड़न करने वाले। उन्होंने अपने रथ को कुरुक्षेत्र और महाभारत की लड़ाई से जोड़ते हुए ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। अखिलेश के मुताबिक, इस बार जेन-जी (Gen-Z) और जेन-अल्फा (Gen-Alpha) पीढ़ी के युवा भी भेदभाव के खिलाफ खड़े हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि 2024 के आम चुनाव में मिली हार के बाद, 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी का पूरी तरह सफाया तय है।
3. कानून-व्यवस्था और व्यवस्थागत कमियों पर सीधा हमला
प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र पर बरसते हुए सपा प्रमुख ने पुलिस की कार्यप्रणाली को चार शब्दों में समेटा—“हथेली गरम, पुलिस नरम।” उन्होंने आरोप लगाया कि एसटीएफ और पुलिस का इस्तेमाल केवल विरोधियों को प्रताड़ित करने और फर्जी मुकदमों में फंसाने के लिए किया जा रहा है।
अखिलेश ने जनता के रोजमर्रा के मुद्दों को छूते हुए सरकार की असफलताओं को रेखांकित किया:
- चुनावी शुचिता पर सवाल: 2022 के नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग पर ‘कठपुतली’ की तरह काम करने और जनादेश की डकैती कराने का आरोप लगाया।
- महंगाई और मिलावट: पेट्रोल की कीमतों में छिपी मिलावट का पर्दाफाश करते हुए उन्होंने कहा कि जनता अब इस छल को समझ चुकी है।
- भर्ती परीक्षाएं और बेरोजगारी: प्रदेश में लगातार हो रहे पेपर लीक और नौकरियों के अभाव को उन्होंने युवाओं के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात बताया।
4. आस्था, विरासत और ‘नकली हिंदुत्व’ का आख्यान
भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक एजेंडे को चुनौती देते हुए अखिलेश यादव ने समान नागरिक संहिता (UCC) और धार्मिक मुद्दों को चुनाव से ठीक पहले जनता को भटकाने की साजिश करार दिया। अयोध्या और काशी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि काशी में बिना नोटिस दिए प्राचीन मंदिरों और राजमाता के नाम पर बने ऐतिहासिक घाटों को बुलडोजर से ढहा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में श्रद्धालुओं के चढ़ावे तक में हेरफेर किया गया। उनके शब्दों में, “यह असली हिंदुत्व नहीं है, बल्कि समाज में नफरत और दरार पैदा करने वाला नकली रूप है।”
5. युवाओं और भविष्य के लिए सपा का रोडमैप
भाषण के अंतिम हिस्से में अखिलेश यादव ने राज्य में सपा की सरकार बनने पर बड़े बदलावों की घोषणा की:
- अग्निवीर व्यवस्था की समाप्ति: थल-सेना भर्ती में लागू अस्थायी व्यवस्था को खत्म कर युवाओं को पक्की सरकारी नौकरियां देना।
- आउटसोर्सिंग पर रोक: आउटसोर्सिंग व्यवस्था को बंद कर पारदर्शी स्थायी नियुक्तियां शुरू करना।
- स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प: वेंटिलेटर पर पड़ी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करना।
कार्यक्रम के दौरान सपा प्रदेश सचिव डॉ. शशिकांत शर्मा की मौजूदगी में अखिलेश यादव ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 15 होनहार छात्र-छात्राओं को मंच पर लैपटॉप देकर सम्मानित भी किया।
-रवि शंकर सिंह, संवादाता, रायबरेली
Rising UttarPradesh राइजिंग उत्तर प्रदेश