IIT-IIM से IAS और अब राजनीति! दिव्या मित्तल का बड़ा फैसला: किसी दल का हाथ थामने के बजाय अकेले लिखेंगी UP की नई कहानी

कॉरपोरेट की शानदार नौकरी छोड़ना, फिर देश की सबसे कठिन आईएएस (IAS) परीक्षा पास करना और 13 सालों तक प्रशासनिक गलियारों में अपनी अलग छाप छोड़ना—दिव्या मित्तल का सफर हमेशा लीक से हटकर रहा है। लेकिन जब उन्होंने अचानक प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र दिया, तो हर कोई हैरान था। 15 सितंबर को शासन द्वारा उनका इस्तीफा मंजूर होते ही एक नया सस्पेंस शुरू हो गया: आखिर दिव्या का अगला कदम क्या होगा?

तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए दिव्या ने अब अपने नए सफर का पर्दाफाश कर दिया है। वे किसी स्थापित राजनीतिक दल का झंडा थामने के बजाय, उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मैदान में अपनी नई राह खुद तराशने जा रही हैं। 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, एक पूर्व नौकरशाह का इस तरह अकेले दम पर मैदान में उतरना प्रदेश की सियासत में एक अनोखा और दिलचस्प प्रयोग माना जा रहा है।

अपनी इस नई पारी की शुरुआत उन्होंने सीधे जनता से संवाद कायम करके की है। एक वीडियो संदेश के जरिए दिव्या ने साफ किया कि वे किसी पार्टी के बैनर तले बंधने की जगह आम लोगों की आवाज बनना चाहती हैं। लोगों को अपनी इस सोच से जोड़ने के लिए उन्होंने एक व्हाट्सएप्प नंबर (9198956957) भी जारी किया है, ताकि जो लोग उनके विचारों से इत्तेफाक रखते हैं, वे सीधे इस मुहिम का हिस्सा बन सकें।

आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ीं 2013 बैच की यह पूर्व अधिकारी अपने काम करने के अलग अंदाज के लिए जानी जाती हैं। विदेश की नौकरी छोड़कर देश सेवा में आईं दिव्या ने यूपी के मिर्जापुर, संतकबीरनगर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी रहते हुए कई अभूतपूर्व काम किए। मिर्जापुर के सूखे से जूझते लहुरियादह गांव में जब पाइप के जरिए नल से पानी पहुंचा, तो वहां के ग्रामीणों के साथ-साथ पूरे प्रदेश ने उनके प्रयासों का लोहा माना। इससे पहले वे मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर और बरेली में भी अहम प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

अपनी मजबूत प्रशासनिक पृष्ठभूमि और सोशल मीडिया पर अच्छी पकड़ के दम पर दिव्या राजनीति का एक नया मॉडल पेश करने की कोशिश में हैं। हालांकि, उनकी भावी रणनीति, विचारधारा और चुनावी खाका कैसा होगा, यह तो आने वाले दिनों में ही साफ होगा; लेकिन इतना तय है कि जनता से सीधे जुड़ाव की यह कोशिश यूपी के सियासी गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर चुकी है।

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