राजधानी लखनऊ आज राजनीति और लोक-संस्कृति के एक अनोखे संगम की गवाह बनी। अवसर था स्वतंत्र भारत के महान जननायक व उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत और उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना को अपनी कविताओं से नई दिशा देने वाले जन-कवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की जयंती का।

बीरबल साहनी मार्ग पर सजी साहित्यिक और सांस्कृतिक शाम
पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन समन्वय समिति के तत्वाधान में बीरबल साहनी मार्ग स्थित उपवन परिसर में एक भव्य और भावपूर्ण स्मरण समारोह आयोजित हुआ। समिति के अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी के मार्गदर्शन में हुए इस कार्यक्रम में लखनऊ में रह रहे उत्तराखंडी समाज के गणमान्य नागरिकों और मातृशक्ति ने भारी संख्या में शिरकत की।
कार्यक्रम की शुरुआत दोनों महान विभूतियों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद मंच पर साहित्य और संवेदनाओं का रंग जमने लगा।
- वरिष्ठ साहित्यकार के.एन. चंदोला, डॉ. करुणा पांडे और ज्ञान पंत ने अपनी ओजस्वी काव्य-रचनाओं के ज़रिए पंडित पंत के राष्ट्र-निर्माण के संकल्पों और ‘गिर्दा’ के जन-जागरण वाले दौर को मंच पर जीवंत कर दिया।
- टी.एस. मनराल, मंगल सिंह रावत, दीवान सिंह अधिकारी, हरीश चंद्र पंत, भवान सिंह रावत, भरत सिंह बिष्ट और पुष्पा वैष्णव जैसे वक्ताओं ने दोनों हस्तियों के विचारों पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने रेखांकित किया कि जहां पंडित गोविंद बल्लभ पंत का पूरा जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और निस्वार्थ जनसेवा का प्रतीक रहा, वहीं ‘गिर्दा’ ने अपनी लोकबोली और गीतों के माध्यम से आम आदमी के संघर्ष और पहाड़ की लोक-संस्कृति को एक बुलंद आवाज़ दी।
लोक-संस्कृति के संरक्षण का लिया गया संकल्प
केवल यादें ताज़ा करने तक सीमित न रहकर, समिति ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला भी लिया। सर्वसम्मति से यह संकल्प व्यक्त किया गया कि बीरबल साहनी मार्ग के इस उपवन को उत्तराखंड की कला, साहित्य और परंपराओं के संरक्षण केंद्र के रूप में संवारा जाएगा। इसके सौंदर्यीकरण और विकास की जिम्मेदारी लेते हुए सदस्यों ने कहा कि यह स्थल आने वाली नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगा। कार्यक्रम का कुशल मंच-संचालन महेंद्र सिंह रावत ने किया।
लोकभवन में मुख्यमंत्री ने किया नमन
इससे पूर्व, राजकीय स्तर पर भी पंडित पंत की पावन स्मृति को आदरपूर्वक नमन किया गया। लोकभवन परिसर में आयोजित औपचारिक कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित उत्तराखंड समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
राजनीति में उच्च आदर्शों की स्थापना करने वाले पंडित पंत और साहित्य के ज़रिए जनचेतना की अलख जगाने वाले ‘गिर्दा’ की यह संयुक्त जयंती हमें याद दिलाती है कि अपनी जड़ों और महापुरुषों की विरासत को सहेजना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
Rising UttarPradesh राइजिंग उत्तर प्रदेश