देश में रसोई का बजट तय करने वाली आवश्यक वस्तुओं में से एक चीनी की कीमतों में पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। मिठास घोलने वाली चीनी अब आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने लगी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चीनी के इन बढ़ते दामों के पीछे सिर्फ मानसून या पैदावार ही नहीं, बल्कि एथेनॉल (Ethanol) का भी बड़ा योगदान है?
आइए समझते हैं कि एथेनॉल और चीनी के बीच क्या संबंध है और क्यों भारतीय बाजार में चीनी के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं।

1. एथेनॉल और चीनी का क्या संबंध है?
गन्ने से सिर्फ चीनी ही नहीं बनती, बल्कि इसके रस और शीरे (Molasses) से एथेनॉल भी तैयार किया जाता है।
- गन्ने से एथेनॉल का निर्माण: चीनी मिलें गन्ने के रस (Sugarcane Juice), बी-हैवी मोलैसेस (B-Heavy Molasses) और सी-हैवी मोलैसेस (C-Heavy Molasses) का उपयोग करके एथेनॉल बनाती हैं।
- पेट्रोल में ब्लेंडिंग (EBP Program): केंद्र सरकार ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए ‘एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल’ (EBP) कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाने (E20 Target) का लक्ष्य रखा गया है।
- डाइवर्जन (डायवर्जन का असर): जब चीनी मिलें ज्यादा से ज्यादा गन्ने के रस का उपयोग एथेनॉल बनाने के लिए करती हैं, तो चीनी के उत्पादन के लिए गन्ना कम बचता है। इससे चीनी का कुल उत्पादन घट जाता है।
2. चीनी के भाव इतने क्यों बढ़ रहे हैं?
चीनी के दामों में आ रहे उछाल के पीछे कई मुख्य कारण हैं:
(क) चीनी उत्पादन में गिरावट और एथेनॉल डाइवर्जन
हाल के वर्षों में चीनी मिलों ने एथेनॉल उत्पादन पर अधिक ध्यान केंद्रित किया क्योंकि इससे उन्हें त्वरित भुगतान और सरकारी प्रोत्साहन मिलता है। उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा एथेनॉल में बदलने से चीनी की कुल उपलब्धता में कमी आई है।
(ख) मौसम की अनिश्चितता और अल नीनो का असर
महाराष्ट्र और कर्नाटक, जो भारत के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में आते हैं, में अनिश्चित बारिश और सूखे जैसी स्थितियों के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। गन्ने की कम पैदावार ने सीधे तौर पर चीनी उत्पादन को घटाया है।
(ग) मांग और आपूर्ति में अंतर
त्योहारी सीजन में चीनी की घरेलू मांग काफी बढ़ जाती है। आपूर्ति कम होने और मांग अधिक होने के कारण थोक और खुदरा बाजारों में कीमतें बढ़ने लगती हैं।
(घ) वैश्विक बाजार में कीमतें और निर्यात नीतियां
वैश्विक स्तर पर भी ब्राजील और अन्य प्रमुख उत्पादक देशों में मौसम की मार के कारण चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अधिक होने का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है।
3. सरकार के कदम और आगे की राह
चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं:
- निर्यात पर प्रतिबंध: सरकार ने चीनी के निर्यात (Sugar Export) पर सीमाएं लगाई हैं ताकि देश के भीतर पर्याप्त स्टॉक बचा रहे।
- एथेनॉल उत्पादन पर अस्थायी नियंत्रण: घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत न हो, इसके लिए सरकार समय-समय पर सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने की सीमाएं और नीतियां तय करती है।
- स्टॉक लिमिट: चीनी सट्टेबाजी और जमाखोरी को रोकने के लिए व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट लागू की जाती है।
निष्कर्ष
एथेनॉल भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका सीधा असर खाद्य सुरक्षा और चीनी की कीमतों पर पड़ता है। संतुलन बनाए रखना ही इस समस्या का मुख्य समाधान है—ताकि एक तरफ भारत का ऊर्जा क्षेत्र मजबूत हो और दूसरी तरफ आम नागरिक के लिए चीनी की मिठास कड़वी न बने।
Rising UttarPradesh राइजिंग उत्तर प्रदेश