लखनऊ के पटेल पार्क में ‘सेवा ज्योति यात्रा’ के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रेखांकित की भारत की आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक बदलाव की नई कहानी।
वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव और आर्थिक मजबूती
बीते ढाई दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। कभी दुनिया की सबसे कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं (‘फ्रैजाइल-5’) में शामिल भारत, आज विश्व की शीर्ष पांच आर्थिक महाशक्तियों में मजबूती से खड़ा है। हजरतगंज स्थित पटेल पार्क में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में नवाचार का एक नया दौर शुरू हुआ है, जहां चंद हजार स्टार्टअप्स से बढ़कर अब यह संख्या ढाई लाख के पार पहुंच चुकी है।

आत्मनिर्भरता के मोर्चे पर देश ने चिप निर्माण से लेकर रक्षा उत्पादन तक ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 12 से अधिक बड़ी इकाइयां तेजी से काम कर रही हैं, जिससे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। साथ ही, हजारों करोड़ रुपये के स्वदेशी रक्षा सामानों का निर्यात यह साबित करता है कि सुरक्षा के मामलों में भारत की वैश्विक धाक जम चुकी है। बुनियादी ढांचे के विस्तार में वंदे भारत, अमृत भारत और नमो भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों, एक्सप्रेसवे के नेटवर्क और इनलैंड वॉटरवे (अंतर्देशीय जलमार्ग) ने कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल दी है।
उत्तर प्रदेश की नई पहचान: माफियाराज से विकास और तकनीक तक
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और सामाजिक माहौल में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अब अपनी पुरानी नकारात्मक छवि से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। एक दौर में जो प्रदेश ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ की अव्यवस्था के लिए जाना जाता था, आज उसकी पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) और स्थानीय खान-पान से होती है।
डिजिटल इंडिया और जनधन खातों के माध्यम से सरकारी तंत्र में पूरी पारदर्शिता आई है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली ने बिचौलियों की भूमिका खत्म कर दी है, जिससे दिल्ली और लखनऊ से भेजी जाने वाली सहायता राशि सीधे जरूरतमंदों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के बैंक खातों में जमा हो रही है। इसके साथ ही, 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को मिल रहा मुफ्त राशन और नि:शुल्क रसोई गैस कनेक्शन सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बना रहे हैं।

आपदा प्रबंधन से वैश्विक नेतृत्व: 2001 से अब तक का सफर
7 अक्टूबर 2001 को जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी, तब वह राज्य भीषण आपदा और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा था। उस विकट परिस्थिति से शुरू हुआ यह सफर आज 25 वर्षों की एक मिसाली प्रशासनिक यात्रा बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी ने एक विशेष राजनीतिक संयोग का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि जब मोदी ने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब लखनऊ के तत्कालीन सांसद अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। आज वही नरेंद्र मोदी वाराणसी के सांसद के रूप में देश का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
यह 25 वर्षों की विकास यात्रा हर वर्ग के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की खुशहाली और युवाओं के स्वरोजगार को समर्पित रही है। देश में एम्स की संख्या 6 से बढ़कर 23 होना और आईआईटी, आईआईएम जैसे शीर्ष संस्थानों का विस्तार इस बात का प्रमाण है कि युवाओं के लिए नए अवसर लगातार बन रहे हैं।

’80 बनाम 20′ का समीकरण और 2047 का संकल्प
राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियां बिल्कुल स्पष्ट हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति एक बार फिर 80 प्रतिशत बनाम 20 प्रतिशत का रूप ले चुकी है, जिसमें 80 फीसदी जनसमर्थन एनडीए के साथ है और शेष 20 फीसदी पीडीए के पाले में।
कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं को ‘सेवा ज्योति’ देकर सभी विधानसभा क्षेत्रों में ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस अभियान का मुख्य ध्येय ‘जन सेवा से देश सेवा’ के विचार को घर-घर पहुंचाना और वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प में हर नागरिक को जोड़ना है।
समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के जनसेवा कार्य को देश का कायाकल्प करने वाला बताया। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों ने ‘जन सेवा से देश सेवा’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें केंद्र व राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं की सफलताओं को दर्शाया गया था।

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