
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित ‘सहारा शहर’ की जमीन पर राज्य की नई विधानसभा (New Vidhan Bhavan Complex) बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस महापरियोजना को धरातल पर उतारने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने प्रशासनिक कवायद तेज कर दी है। एलडीए ने नए विधानभवन कॉम्प्लेक्स की वास्तुकला, डिजाइन और व्यापक प्लानिंग के लिए ग्लोबल स्तर के कंसल्टेंट और आर्किटेक्ट के चयन की प्रक्रिया शुरू करते हुए आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया है।
लखनऊ को मिलेगी नई पहचान
नई विधानसभा दिल्ली की सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर तैयार की जाएगी. यह हाईटेक परिसर लखनऊ को एक नई पहचान देने के साथ ही राज्य की विधायी व्यवस्था को आधुनिक और विस्तार योग्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. मौजूदा विधानसभा शहर के बीचों बीच हजरतगंज में स्थित है. सदन की कार्यवाही के दौरान जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है. अब नई विधानसभा का परिसर गोमती नगर में बनेगा. यह क्षेत्र बेहतर कनेक्टिविटी और लोकेशन के कारण परिसर निर्माण के लिए आदर्श स्थान साबित होगा.
23 मई से 21 जून तक कंपनियां कर सकेंगी आवेदन
एलडीए (LDA) की ओर से जारी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) के अनुसार, इस प्रतिष्ठित परियोजना का हिस्सा बनने के लिए इच्छुक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां 23 मई से लेकर 21 जून तक अपने आवेदन और प्रपोजल जमा कर सकेंगी। इस समयावधि के भीतर प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद सबसे योग्य कंसल्टेंट फर्म का चयन किया जाएगा।
यूपी की नई विधानसभा कितने एकड़ में बनेगी?
यूपी का नया विधान भवन लखनऊ के पॉश इलाके गोमती नगर (विपुल खंड) स्थित ‘सहारा शहर’ की 245 एकड़ विशाल भूमि पर आकार लेगा. यह जमीन पहले सहारा समूह को लीज पर दी गई थी, जिसे नियमों के उल्लंघन के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और नगर निगम ने वापस अपने कब्जे में ले लिया है.
कितनी लागत आएगी?
इस मेगा प्रोजेक्ट के शुरुआती मास्टर प्लान और डिजाइन/कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने हालिया बजट (मई 2026 में पारित बजट 2026-27) में 100 करोड़ के शुरुआती टोकन अमाउंट का प्रावधान किया है. पूरे परिसर, सचिवालय और आधुनिक सुविधाओं को मिलाकर कुल प्रोजेक्ट की अंतिम निर्माण लागत कई सौ करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो आर्किटेक्चरल डिजाइन फाइनल होने के बाद पूरी तरह स्पष्ट होगी.
कब तक बनेगी नई यूपी विधानसभा?
प्रशासनिक स्तर पर कोशिश है कि इसका निर्माण कार्य तेजी से शुरू किया जाए. चूंकि साल 2026 के बाद देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों का नया परिसीमन (Delimitation) होना प्रस्तावित है, जिससे उत्तर प्रदेश में विधायकों की संख्या वर्तमान 403 से काफी बढ़ जाएगी. इसी भविष्य की आवश्यकता (विधायकों के बैठने की क्षमता) को देखते हुए सरकार इसे अगले कुछ वर्षों के भीतर (संभावित रूप से 2029-2030 तक) पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है.
जानकारों का कहना है कि सरकार को नई विधानसभा बनाने के लिए करीब 200 एकड़ जमीन की तलाश थी। सहारा शहर से कब्जे में ली गई यह जमीन जगह, लोकेशन और आवागमन के हिसाब से सबसे उपयुक्त है। विधानसभा के साथ ही यहां सचिवालय, मुख्यमंत्री निवास व अन्य सरकारी कार्यालय भी बनाए जाएंगे। इसके चलते ही टेंडर में विधानभवन काॅम्प्लेक्स निर्माण की बात कही गई है।
सौ साल पुराना है वर्तमान भवन
दरअसल वर्तमान समय में जो विधानभवन हैं वो सौ साल पुराना है. समय के साथ विधायकों की बढ़ती संख्या, डिजिटल कार्यप्रणाली और आधुनिक सुरक्षा मानकों की ज़रूरत महसूस की जा रही है. जिसके चलते नया विधान भवन बनाने की आवश्यकता है.
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