इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताया है।
यह आदेश अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

न्यायालय ने जोर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 243 ई और 243 (के) के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच साल का निश्चित होता है और चुनाव समय पर होने चाहिए। राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को देरी का कारण बताया, जिस पर कोर्ट ने हैरानी जताई कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद ओबीसी आयोग ने अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित हो चुकी है और वे चुनाव कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन राज्य सरकार से आवश्यक लॉजिस्टिक्स न मिलने के कारण चुनाव में बाधा आ रही है।
न्यायालय ने प्रधानों को प्रशासक के रूप में जारी रखने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और चुनाव कराने की स्पष्ट समय-सीमा का उल्लेख हो। यदि सरकार ऐसा करने में विफल रहती है, तो संबंधित प्रतिवादी संख्या दो (जिसने 25 मई 2026 का आदेश जारी किया था) को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा कि असंवैधानिक प्रावधानों के तहत आदेश क्यों जारी किए गए। ऐसा न करने पर इसे प्रथम दृष्टया अवमानना माना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को दोपहर दो बजे होगी।
यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो गया था। प्रदेश में 57 हजार से ज्यादा ग्राम हैं। ग्राम पंचायत चुनाव में देरी होने के चलते सरकार की तरफ से ग्राम प्रधानों को प्रशासक बना दिया गया था। इसी मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
यूपी ग्राम पंचायत चुनाव कब होंगे?
आपको बता दें कि यूपी सरकार पहले ही ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी दे चुकी है। यह आयोग प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर पिछड़े वर्गों की वास्तविक आबादी और उनकी स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर ही ग्राम पंचायतों में आरक्षण तय होगा। ऐसे में पंचायत चुनाव में करीब 6 महीने की देरी हो सकती है।
यूपी पंचायत चुनाव में कितने वोटर?
इससे पहले हाल ही में पंचायत चुनाव से संबंधित वोटर लिस्ट भी जारी की गई थी। फाइनल की गई वोटर लिस्ट के मुताबिक, पंचाय चुनाव के लिए यूपी में अब 12 करोड़ 58 लाख से ज्यादा वोटर हैं। वोटर लिस्ट में लगभग 1.81 करोड़ नए मतदाता जोड़े गए हैं।
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