200 हेक्टेयर में विकसित होगा राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा, गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे UPEIDA टीम ने राजस्व अधिकारियों के साथ किया सर्वे

उत्तर प्रदेश में यूपीडा (UPEIDA) और राजस्व अधिकारियों की टीम ने गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगभग 200 हेक्टेयर क्षेत्र में भूमि चिह्नित व अधिग्रहित कर सर्वे का कार्य शुरू किया है। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

रायबरेली : लालगंज गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे करीब 200 हेक्टेयर यानी लगभग 1000 बीघे क्षेत्र में औद्योगिक गलियारा विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यह गलियां निहस्था, जगतपुर रामगढ़ी और सुर्जीपुर गुमानखेड़ा गावों के आसपास प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने कवायद तेज कर दी है। UPEIDA की टीम ने राजस्व अधिकारियों के साथ प्रस्तावित क्षेत्र का स्थलीय सर्वे किया। सर्वे के दौरान जमीन की स्थिति और उपलब्धता समेत अन्य बिंदुओं की जानकारी जुटाई गई। भूमि अधिग्रहण का निर्णय अभी UPEIDA स्तर से होना है। औद्योगिक गलियारा बनने से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। तहसीलदार शिवम राठौड़ ने बताया कि यूपीडा की टीम ने संबंधित क्षेत्र का सर्वे किया है। औद्योगिक गलियारा विकसित करने को लेकर अंतिम निर्णय यूपीडा स्तर से लिया जाएगा।

गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे करीब 200 हेक्टेयर यानी लगभग 1000 बीघे क्षेत्र में औद्योगिक गलियारा विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यह गलियारा निहस्था, जगतपुर रामगढ़ी और सुरजीपुर गुमानखेड़ा गांवों के आसपास प्रस्तावित है। इसे लेकर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने कवायद तेज कर दी है। यूपीडा की टीम ने राजस्व अधिकारियों के साथ प्रस्तावित क्षेत्र का स्थलीय सर्वे किया है।

सर्वे के दौरान जमीन की स्थिति और उपलब्धता समेत अन्य बिंदुओं की जानकारी जुटाई गई।तहसील प्रशासन के अनुसार किसानों की भूमि को परियोजना के लिए लिए जाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और अंतिम क्षेत्रफल का निर्णय अभी यूपीडा स्तर से होना है। औद्योगिक गलियारा बनने से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। उद्योग स्थापित होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे प्रत्यक्ष के साथ ही परिवहन, दुकान, होटल, ढाबा और अन्य सेवाओं से जुड़े अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा हो सकते हैं।

-रवि शंकर सिंह, संवादाता, रायबरेली

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