PCS अधिकारी ज्योति मौर्या और पंचायती राज विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात उनके पति आलोक मौर्या के बीच करीब ढाई साल से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है. दोनों ने आपसी सहमति से साथ रहने का फैसला किया है. ज्योति की नोएडा में पोस्टिंग हुई है, जबकि आलोक सिविल सर्विसेज की तैयारी में भी जुटे हैं. यह मामला पहले आरोप-प्रत्यारोप और जांच के कारण काफी चर्चा में रहा था.
आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ता विवाद
समय के साथ यह मामला निजी दायरे से निकलकर सार्वजनिक मंच तक पहुंच गया. आलोक मौर्या ने अपनी पत्नी पर भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए. उन्होंने शासन से इसकी शिकायत भी की और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई. यही नहीं, उन्होंने ज्योति मौर्या पर एक अन्य अधिकारी के साथ संबंध होने का भी आरोप लगाया, जिससे मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया. इन आरोपों के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच के आदेश दिए गए. एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई, जिसने दोनों पक्षों से साक्ष्य मांगे. हालांकि, जांच के दौरान मामला अचानक मोड़ लेता दिखा, जब आलोक मौर्या ने अपने आरोपों को साबित करने के बजाय शिकायत वापस ले ली. इसके बाद जांच कमेटी ने मामले को समाप्त करने की रिपोर्ट दे दी.
सोशल मीडिया पर हुई खूब चर्चा
यह विवाद सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा. सोशल मीडिया पर यह मामला लगातार ट्रेंड करता रहा. कभी ज्योति मौर्या के समर्थन में आवाज उठी, तो कभी आलोक मौर्या के पक्ष में लोग सामने आए. इस पूरे घटनाक्रम ने समाज में कई सवाल खड़े किए थे क्या सफलता रिश्तों को बदल देती है? क्या पति-पत्नी के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता जा रहा है? आलोक मौर्या ने इस दौरान पुरुषों के अधिकारों को लेकर भी आवाज उठाई. उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को पत्र लिखकर पुरुष आयोग के गठन की मांग की. हाल के दिनों में उनकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिनमें वह लोक सेवा आयोग के पास नजर आए. इसके बाद यह अफवाह भी फैली कि उनका चयन SDM पद के लिए हो गया है. हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि वह अपने एक मित्र को बधाई देने वहां पहुंचे थे, जिसका चयन हुआ था.
अब क्यों बदला रुख
करीब ढाई साल तक चले विवाद के बाद दोनों का एक साथ आना कई लोगों के लिए आश्चर्य का विषय है. हालांकि, इसे एक परिपक्व निर्णय के रूप में भी देखा जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, परिवार और करीबी लोगों की पहल के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे मतभेद कम होते गए. अंततः दोनों ने साथ रहने का फैसला किया. यह फैसला सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों के लिए भी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से इस विवाद के कारण मानसिक दबाव में थे.
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