पवित्र तीर्थ स्थल चित्रकूट में कुदरत ने जब अपना रौद्र रूप दिखाया, तो मंदाकिनी और सेमरावल नदियां अपने किनारों को लांघकर बस्तियों में समाने लगीं। देखते ही देखते 16 गांव पानी के आगोश में समा गए और लोगों के आशियाने जलमग्न हो गए। लेकिन इस भयानक आपदा के बीच सबसे बड़ी राहत यह रही कि किसी भी इंसान की जान नहीं गई। संपत्ति और घरों का भारी नुकसान जरूर हुआ, लेकिन समय रहते उठाए गए कदमों ने एक बड़े हादसे को टाल दिया।

रात-दिन चला बचाव अभियान, 700 लोगों को मिला नया सहारा
बाढ़ की खबर मिलते ही राहत और बचाव का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया। बीते 24 घंटों के भीतर पानी से घिरे इलाकों से 700 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालकर राहत शिविरों तक पहुँचाया गया।
आपदा की इस घड़ी में प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद जमीनी हकीकत जानने पहुंचे। उन्होंने जलभराव वाले इलाकों में पैदल चलकर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की। बेघर हुए परिवारों का हाथ थामकर उन्हें ढांढस बंधाया और मौके पर ही भोजन, कपड़े व जरूरी राशन बांटने के आदेश दिए। इसके साथ ही सतना जिले के प्रभावित क्षेत्रों में हर घर का सर्वे कर जल्द से जल्द मुआवजा राशि देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
ग्राउंड जीरो पर जब बोट और पैदल ही निकल पड़े अफसर
कागजी निर्देशों से इतर, धरातल पर स्थिति संभालने के लिए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह खुद मोर्चे पर उतरे। सबसे ज्यादा प्रभावित ‘तरौहाँ’ गांव की गलियों में जब सामान्य आवाजाही नामुमकिन हो गई, तो दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने मोटरबोट का सहारा लिया और कई जगह घुटने तक पानी में पैदल चलकर लोगों का हाल जाना।
प्रशासन ने राहत सामग्री बांटने से पहले पूरे इलाके का सर्वे कराया, ताकि हर उस परिवार तक मदद पहुंचे जिसे इसकी सख्त जरूरत थी।
राहत किट, हाई अलर्ट और एहतियाती कदम
शिविरों में रह रहे लोगों के लिए राहत सामग्री का वितरण तेजी से किया जा रहा है। बांटी जा रही राशन किट में:
- खाद्यान्न: आटा, चावल, दालें और सूखा भोजन
- जरूरी सामान: रात के अंधेरे से निपटने के लिए मोमबत्तियां
- स्वास्थ्य: प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी दवाइयां
नदियों का जलस्तर पल-पल बदल रहा है, जिसे देखते हुए पूरी प्रशासनिक और पुलिस टीम को चौबीसों घंटे हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है।
धैर्य रखें और अफवाहों से बचें
स्थानीय प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे इस मुश्किल समय में संयम बनाए रखें। किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा न करें और उफनते पानी के पास जाने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस या प्रशासनिक टीम को सूचित करें। जब तक नदियां शांत नहीं हो जातीं, नियंत्रण कक्ष से 24 घंटे स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
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