लखनऊ का गोमती नगर इलाका उस वक्त “जय श्रीकृष्ण” के नारों से गूंज उठा, जब ‘विश्व हिंदू रक्षा परिषद’ के कार्यकर्ता मथुरा जाने के लिए सड़कों पर उतरे। हालांकि, जैसे ही काफिला आगे बढ़ा, पुलिस बल ने घेराबंदी करके उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। खाकी के इस कड़े पहरे के बावजूद कार्यकर्ताओं का उत्साह कम होने के बजाय और बुलंद नज़र आया।

दरअसल, यह पूरी हलचल श्रीकृष्ण जन्मभूमि की गरिमा की रक्षा और पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे आंदोलनकारी रोहित मलान के समर्थन में शुरू हुई है। संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय की अगुवाई में सैकड़ों कार्यकर्ता मथुरा पहुंचकर इस आवाज़ को और मजबूत करना चाहते थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर गोपाल राय ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन उन्हें आज रोक सकता है, लेकिन उनके संकल्प को डिगा नहीं सकता। वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाते रहेंगे।
इस पूरे आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग मथुरा-वृंदावन जैसे पवित्र धाम में मांस और मदिरा की बिक्री पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाने की है। गोपाल राय के अनुसार, कान्हा की यह नगरी केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि दुनियाभर के करोड़ों सनातनियों के विश्वास की धरोहर है। ऐसे पावन तीर्थ स्थल पर मांस-मदिरा की खरीद-फरोख्त से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरा आघात पहुंचता है।
दिन की शुरुआत परिषद के गोमती नगर स्थित कार्यालय में एक विशेष माहौल के साथ हुई थी। वहां पहले भगवान श्रीकृष्ण का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया और फिर सनातन संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं का समूह हाथ जोड़े और नारे लगाता हुआ मथुरा कूच के लिए रवाना हुआ था।
संगठन ने अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने मांग रखी है कि सरकार मथुरा की सांस्कृतिक विरासत, पवित्रता और धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए ठोस और सकारात्मक कदम उठाए। इसके साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि यदि प्रशासन ने रोहित मलान की मांगों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो परिषद पूरे प्रदेश में व्यापक जन-जागरण अभियान चलाएगी और जल्द ही हज़ारों समर्थकों के साथ दोबारा मथुरा की ओर रुख करेगी।
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