प्रदेश की राजधानी लखनऊ से इस स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत हो रही है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (गोमतीनगर विस्तार) में ₹855 करोड़ से अधिक की लागत से 1,010 बिस्तरों वाला एक विशाल अस्पताल भवन बनने जा रहा है। इसके साथ ही, लोहिया संस्थान में किडनी, लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी सुपर-स्पेशियलिटी यूनिट्स भी अब पूरी तरह बनकर तैयार हैं, जिससे मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

अन्य प्रमुख शहरों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है:
- मेरठ: आपातकालीन स्थिति में बेहतर इलाज देने के लिए मौजूदा ट्रॉमा सेंटर को ₹48.15 करोड़ की लागत से 100 बेड वाले ‘लेवल-1’ ट्रॉमा सेंटर में बदला जा रहा है। साथ ही, बच्चों के बेहतर इलाज के लिए ₹34.82 करोड़ से बाल रोग विभाग (MCH सेंटर) तैयार हो रहा है।
- कानपुर: संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए लगभग ₹49.40 करोड़ से एक अलग विशेष अस्पताल बनाने की योजना है।
- झांसी: एमबीबीएस की बढ़ी हुई सीटों को ध्यान में रखते हुए ₹28.44 करोड़ से नए लेक्चर थिएटर, लाइब्रेरी, कॉन्फ्रेंस हॉल और परीक्षा भवन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, छात्राओं के लिए ₹26.89 करोड़ की लागत से 272 बेड का हॉस्टल भी शामिल है।
चिकित्सा शिक्षा को मजबूती देने के लिए नर्सिंग कॉलेजों का नेटवर्क भी फैलाया जा रहा है। गोंडा में ₹9.93 करोड़ से नया नर्सिंग कॉलेज प्रस्तावित है। वहीं बहराइच, अयोध्या, हरदोई, सहारनपुर (60 सीटों वाला बी.एससी. नर्सिंग) और ग्रेटर नोएडा (GIMS) में नर्सिंग कॉलेजों की इमारतें बनकर तैयार हैं, जिनका जल्द ही लोकार्पण किया जाएगा।
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की इस पूरी मुहीम का कुल बजट ₹1,606.83 करोड़ है, जिसके तहत 65 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इसमें ₹1,400.70 करोड़ की 44 नई परियोजनाओं की आधारशिला (शिलान्यास) रखी जाएगी, जबकि ₹206.13 करोड़ की 21 पूरी हो चुकी परियोजनाओं का उद्घाटन होगा। इसमें अस्पतालों की मुख्य इमारतों के अलावा पीने के पानी, सीवरेज सिस्टम और हॉस्टल जैसी तमाम बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं।
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