लोलार्क षष्ठी स्नान:
मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर मध्यरात्रि के बाद से ही नि:संतान दंपती संतान सुख की प्राप्ति के लिए कुंड में स्नान करते हैं
धार्मिक मान्यता: स्नान के पश्चात श्रद्धालु अपने गीले वस्त्र वहीं कुंड के पास छोड़ते हैं, फल दान करते हैं तथा जीवनभर के लिए किसी एक फल या सब्जी का त्याग (संकल्प) करते हैं

लोलार्केश्वर महादेव दर्शन: कुंड में स्नान के उपरांत व्रती और श्रद्धालु पास स्थित लोलार्केश्वर महादेव का दर्शन-पूजन करते हैं।
वर्ष 2026 में लोलार्क षष्ठी (लोलार्क कुंड स्नान) मुख्य रूप से 17 सितंबर 2026 (गुरुवार) को पड़ रही है
पंचांग और तिथियों की गणना के अनुसार इस पर्व से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:स्नान की शुरुआत: षष्ठी तिथि की शुरुआत 16 सितंबर 2026 की शाम से ही हो जाएगी, इसलिए श्रद्धालु 16 सितंबर की देर रात (मध्यरात्रि के बाद) से ही लाइन में लगना और कुंड में आस्था की डुबकी लगाना शुरू कर देंगे।
मुख्य स्नान का दिन: उदयातिथि के अनुसार सूर्योदय कालीन मुख्य स्नान का महापर्व 17 सितंबर 2026 को ही मनाया जाएगा।
भगवान कार्तिकेय का दर्शन
भाद्र शुक्ल षष्ठी को ही भगवान कार्तिकेय का दर्शन-पूजन वंदन करने से सभी तरह के कष्टों के साथ ही ब्रह्म हत्या तक से मुक्ति मिल जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, सूर्य देव द्वारा भगवान शंकर की आराधना के बाद इस लोलार्क कुंड और लोलार्केश्वर महादेव मंदिर स्थापना हुई थी।

परंपरानुसार भाद्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन पुत्र प्राप्ति की कामना से सूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए इस लोलार्क कुंड में सपत्नीक स्नान करने का विधान है। स्नान करने के बाद अपने शरीर पर पहने हुए वस्त्र को वहीं त्याग कर नवीन वस्त्र धारण कर लिया जाता है। एक फल बेल, धतूर का फल , लौकी, कोहड़ा आदि कुंड में छोड़ा जाता है। जिसे जीवन पर्यंत नहीं खाया जाता। कुंड में स्नान के बाद जिसकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है, वह मां गंगा, लोलार्क बाबा ( सूर्य ) व भगवान शंकर को कढ़ाही चढ़ाते हैं। मंदिर के पुजारी के मुताबिक, कुंड में स्नान के बाद श्रद्धालु अपने पहने हुए कपड़े वहीं छोड़ देते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि अपने पुराने कपड़ों के साथ ही वे अपने शारीरिक कष्टों को भी यहीं छोड़ जाते।

सूर्य षष्ठी पर भदैनी स्थित लोलार्क कुंड में स्नान व लोलार्केश्वर महादेव का दर्शन पूजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन लोलार्क कुंड में स्नान-दान, फल त्याग करने के साथ ही लोलार्केश्वर महादेव का दर्शन व्रतियों द्वारा किया जाता है। श्रद्धाभाव से इस पूजा को करने वाले पर सूर्य की कृपा से बरसती है और सूनी गोद हरी हो जाती हैै।
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