
सरकार ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद बड़ा फैसला लिया है. नई पंचायतों के गठन तक निवर्तमान ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में गांवों का सामान्य प्रशासनिक काम संभालेंगे.
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में अब विकास कार्य नहीं रुकेंगे। पंचायत चुनाव में देरी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही छह माह तक प्रशासक बनाए जाने को मंजूरी दे दी है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के निर्देश पर प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार ने सोमवार को इसका आदेश जारी कर दिया।
अब बुधवार से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधान प्रशासक की भूमिका निभाएंगे। इससे गांवों में सफाई, पेयजल, मनरेगा, सड़क मरम्मत और अन्य जरूरी विकास कार्य चलते रहेंगे। सरकार ने यह फैसला पंचायत चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया लंबी होने के कारण लिया है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में समय लगेगा। ऐसे में पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रशासक बैठाए जाने की खबर अमर उजाला ने 6 अप्रैल के अंक में ही प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
डीएम को मिला अधिकार: आदेश के मुताबिक मंगलवार को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिलाधिकारी निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नामित करेंगे। हालांकि प्रशासक केवल सामान्य और रूटीन कार्य ही कर सकेंगे। किसी भी बड़े या नीति संबंधी फैसले के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से डीएम की अनुमति लेना जरूरी होगा।
आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने में लगेगा समय
राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया है। आयोग जिलों में जाकर आबादी का आंकड़ा जुटाएगा और उसी आधार पर आरक्षण तय होगा। नियम के मुताबिक किसी ब्लॉक में ओबीसी आबादी 27 प्रतिशत से अधिक होने पर भी आरक्षण 27 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा। अगर आबादी इससे कम है तो उसी अनुपात में सीटें आरक्षित होंगी। आयोग को आरक्षण की इस प्रक्रिया को पूरा करने में अभी समय लगेगा।
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