पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा’ लॉन्च: सीएम योगी ने किया विमोचन, परौंख से राष्ट्रपति भवन तक के सफर की अनकही दास्तान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को एक ऐतिहासिक आयोजन के दौरान देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का लोकार्पण किया गया। लोकभवन सभागार में आयोजित इस गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए इस बहुप्रतीक्षित पुस्तक का विमोचन किया।

रूपा पब्लिकेशंस इंडिया द्वारा प्रकाशित यह कृति सिर्फ एक आत्मकथा नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस अंतर्निहित शक्ति का जीवंत दस्तावेज है, जो एक आम नागरिक को अपनी मेहनत, प्रतिबद्धता और सादगी के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचा सकती है। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री समेत कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

संघर्ष से शिखर तक का सफर

कानपुर देहात के एक छोटे से ग्रामीण इलाके परौंख से निकलकर देश के सर्वोच्च कार्यालय तक पहुंचने वाले रामनाथ कोविन्द का जीवन हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वकालत के दिनों—खासकर 1977 से 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के अधिवक्ता के रूप में कार्य करने—से लेकर उच्चतम न्यायालय के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बनने और फिर संसद में दो कार्यकाल पूरे करने तक, उनका सफर प्रशासनिक और कानूनी प्रतिबद्धता की मिसाल रहा है। 25 जुलाई 2017 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले उन्होंने बिहार के राज्यपाल के रूप में भी निष्काम भाव से सेवाएं दीं।

आत्मकथा के अनछुए और ऐतिहासिक पहलू

यह पुस्तक केवल उनके निजी जीवन के संघर्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्रपति के रूप में उनके पाँच वर्षों के कार्यकाल के कई अनसुने और महत्वपूर्ण अध्यायों को गहराई से उकेरा गया है।

  • ऐतिहासिक निर्णय और संवैधानिक भूमिका: कोविड-19 महामारी जैसे वैश्विक संकट के दौर में लिए गए अहम फैसले, केंद्र-राज्य संबंधों की बारीकियां और देश की शासन व्यवस्था से जुड़े कई अनुभव इसमें समाहित हैं।
  • सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में दायित्व: राष्ट्र की सुरक्षा और रक्षा मामलों से जुड़े उनके विजन को इसमें बेहद करीब से दर्शाया गया है।
  • लोकतांत्रिक और दार्शनिक दृष्टिकोण: कानून, इतिहास, राजनीति और अध्यात्म जैसे विषयों में गहरी रुचि रखने वाले श्री कोविन्द के विचार इस पुस्तक को एक अनमोल वैचारिक धरोहर बनाते हैं।

यह कृति भारतीय राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को नजदीक से समझने के साथ-साथ देश की लोकतांत्रिक मजबूती और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा का एक बेहतरीन दस्तावेज है।

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