उत्तर प्रदेश का हाई-प्रोफाइल जिला रायबरेली इस समय बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से जूझ रहा है। रतापुर चौराहे से सब्जी और गल्ला मंडी को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग खस्ताहाली की हदें पार कर चुका है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और जमा गंदा पानी अब राहगीरों व स्थानीय व्यापारियों के लिए जान का जोखिम बन गए हैं।

प्रशासनिक उपेक्षा और रोज होते हादसे
सड़क पर पानी भरा होने की वजह से यह अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है कि रास्ता कहाँ है और खतरनाक गड्ढा कहाँ। इसका सबसे बड़ा खामियाजा स्थानीय दुकानदारों और दैनिक यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
रमेश सोनकर, मान सोनकर, गुड्डू सोनकर और अमरावती समेत कई स्थानीय फल विक्रेताओं का कहना है कि आए दिन लोग इन छिपे हुए गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। कई घायलों को तो गंभीर हालत में जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचाना पड़ा है। इसके बावजूद, नगरपालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी (EO) सवर्ण सिंह और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी इस समस्या से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं।

मंत्रियों के दावों और जमीनी हकीकत का अंतर
रायबरेली जिले से मौजूदा भाजपा सरकार में दो-दो कैबिनेट मंत्री प्रतिनिधित्व करते हैं—दिनेश प्रताप सिंह (स्वतंत्र प्रभार मंत्री) और सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मनोज कुमार पांडेय (खाद्य एवं रसद कैबिनेट मंत्री, ऊंचाहार विधायक)।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दोनों मंत्री केवल रायबरेली में ‘चौमुखी विकास’ के खोखले वादे करते हैं, जबकि धरातल की स्थिति इसके ठीक उलट है। लंबे समय से बनी इस समस्या पर मंत्रियों की चुप्पी से नाराज लोगों का कहना है कि जनता को गुमराह करने का यह रवैया आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भारी पड़ेगा।
विपक्ष का तीखा हमला
इस मुद्दे पर सियासी गरमाहट भी बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश सचिव और ऊंचाहार से पूर्व प्रत्याशी अतुल सिंह ने सत्तापक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। उनका कहना है कि:
“जनता की बुनियादी समस्याओं को हल करने में नाकाम रहे भाजपा मंत्री केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी पर अनाप-शनाप बयानबाज़ी करते रहते हैं। रायबरेली की समझदार जनता अब इनके छलावे में नहीं आने वाली।”
-रवि शंकर सिंह, संवादाता, रायबरेली
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