उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने जमीनी स्तर पर अपनी किलेबंदी मजबूत करनी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में राजधानी दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच करीब एक घंटे तक उच्चस्तरीय वार्ता हुई। राज्य में बदलते सियासी माहौल के बीच दोनों शीर्ष नेताओं की यह बैठक चुनावी रणनीति और सांगठनिक तालमेल के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

18,000 ग्रामीण बूथों पर विशेष नजर
भाजपा द्वारा कराए गए अंदरूनी सर्वे में ऐसे 18,000 से अधिक बूथों की पहचान की गई है, जहाँ 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन 2024 के आम चुनाव में वोट शेयर में गिरावट दर्ज की गई।
- क्षेत्रीय असर: अवध और पूर्वांचल के जिलों में ऐसे कमज़ोर बूथों की संख्या सबसे अधिक है।
- ग्रामीण केंद्र बिंदु: चिह्नित किए गए कुल स्थानों में से लगभग 80 प्रतिशत बूथ ग्रामीण इलाकों से आते हैं।
- रणनीति: इन क्षेत्रों में स्थानीय संवाद बढ़ाने और संगठन की गतिविधियों को फिर से धार देने के लिए वरिष्ठ पदाधिकारियों को मैदान में उतारा जाएगा।
‘जातीय समीकरण’ के जरिए विपक्षी दांव को बेअसर करने की तैयारी
हाल ही में प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने वाले राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने 6 सितंबर को राज्य के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ चुनावी फीडबैक लिया था। इस समीक्षा बैठक में यह बात स्पष्ट हुई कि विपक्ष इस बार आरक्षण, संविधान और ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर भाजपा की राह कठिन करने की कोशिश कर रहा है।
इस चुनौती से निपटने के लिए पार्टी ने ‘सर्वसमाज भागीदारी’ का नया फॉर्मूला तैयार किया है:
- संतुलित प्रतिनिधित्व: प्रत्येक बूथ पर जिस-जिस वर्ग की मौजूदगी होगी, वहां की बूथ कमेटी में उन सभी सामाजिक समूहों को सीधी जगह दी जाएगी।
- स्थानीय जुड़ाव: पार्टी का मानना है कि उसी समाज का स्थानीय प्रतिनिधि अपने लोगों से बेहतर संवाद स्थापित कर सकता है, जिससे भ्रम की स्थिति दूर करने में आसानी होगी।
2026 में शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकों का दौर जारी
यह पहला मौका नहीं है जब इस वर्ष दोनों नेताओं के बीच इस तरह का गहन मंथन हुआ है। इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने 11 जून 2026 और फिर 8 अगस्त 2026 को भी पीएम मोदी और सीएम योगी के बीच हुई आधिकारिक मुलाकातों की पुष्टि की थी।
शनिवार को हुई इस ताजा बैठक के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि उत्तर प्रदेश में संगठन और सरकार के स्तर पर जल्द ही कुछ बड़े फैसले और नए दिशानिर्देश सामने आ सकते हैं।
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