प्रशासनिक सेवा की कड़क और अनुशासित दुनिया को पीछे छोड़कर, उत्तर प्रदेश की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अब सीधे जनसेवा के सियासी सफर पर कदम रख दिया है। उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जननीति भारत पार्टी’ के औपचारिक गठन का ऐलान कर दिया है और साथ ही यह साफ कर दिया है कि वह चुनावी अखाड़े में उतरकर मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाएंगी।

प्रशासनिक अनुभव से सियासी मैदान तक का सफर
मिर्जापुर और देवरिया जैसे अहम जिलों में बतौर जिलाधिकारी अपनी प्रशासनिक दक्षता का लोहा मनवा चुकीं दिव्या मित्तल का यह कदम पूर्वांचल के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। नवरात्र के पावन अवसर पर मां विंध्यवासिनी का आशीर्वाद लेते हुए उन्होंने सियासत में एक नई पारी की शुरुआत की है। उनकी यह राजनीतिक पहल सिर्फ एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि उनकी योजना पूरे उत्तर प्रदेश में अपने उम्मीदवार खड़े करने की है।
पार्टी के तीन मुख्य आधार और विजन
दिव्या मित्तल की इस नई राजनीतिक सोच की नींव तीन मुख्य वचनों और स्तंभों पर टिकी है:
- जन से नीति, नीति से भारत: पार्टी का पहला और सबसे अहम मंत्र यही है कि देश और समाज के लिए नीतियां एयरकंडीशन कमरों में बैठकर नहीं, बल्कि जमीन की असल सच्चाइयों और आम जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी। एक माँ जो खुद भूखी रहकर अपने बच्चे का पेट भरती है या एक पिता जो खेत में कड़ी मेहनत कर बच्चों को पढ़ाता है—यही जमीनी चिंताएं पार्टी के फैसलों का मुख्य आधार बनेंगी। किसानों की उपज के सही दाम से लेकर छोटे व्यापारियों की परेशानियों को दूर करने तक, हर नियम उन लोगों के साथ मिलकर तय किया जाएगा जो खुद उन समस्याओं से रूबरू होते हैं।
- जरूरत से फैसला और फैसले में बराबरी: दूसरा वचन यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी योजनाएं और विकास कार्य किसी की जाति, धर्म या रसूख को देखकर नहीं, बल्कि शुद्ध रूप से आवश्यकता के आधार पर लागू हों। अक्सर प्रभावशाली लोगों के दबाव में विकास कार्यों के रास्ते बदल दिए जाते हैं, जिससे आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जननीति भारत एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था लाना चाहती है जहां हर प्रभावित व्यक्ति की राय ली जाए। इसके साथ ही, महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के लिए एक ऐसा आधुनिक मॉडल पेश किया जाएगा जिसमें तकनीक (जैसे मोबाइल ऐप) के जरिए असुरक्षित क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां तुरंत पुलिस गश्त और कैमरे लगाए जाएं, न कि किसी अप्रिय घटना के घटने का इंतजार किया जाए।
- जनता को हिसाब और हिसाब से सुधार: सरकारी कामकाज में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए पार्टी ने ‘थ्री-कलर सिस्टम’ (हरा, पीला और लाल रंग) का प्रस्ताव रखा है। इसके माध्यम से आम नागरिक अपने मोबाइल फोन पर यह देख सकेंगे कि उनके क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य की स्थिति क्या है, उस पर कितना बजट खर्च हुआ है और उसकी गुणवत्ता कैसी है। अधिकारियों के मूल्यांकन पर आँख मूँदकर भरोसा करने के बजाय, जनता खुद अपने सीधे फीडबैक से व्यवस्था की कमियों को दूर कर सकेगी।
जनता की ओर मुखातिब होंगे विधायक
पार्टी के जनप्रतिनिधियों की भूमिका को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि आम तौर पर विधायक सरकार और जनता के बीच रहकर सिर्फ सरकार की तरफ देखते हैं, लेकिन जननीति भारत के विधायक जनता की तरफ मुंह करके बैठेंगे। यानी उनका मुख्य कर्तव्य जनता की आवाज, उनकी समस्याओं और उनकी जरूरतों को बिना किसी रुकावट के सीधे शासन तक पहुँचाना होगा।
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