जो बुंदेलखंड कभी सूखे और आर्थिक तंगी के लिए जाना जाता था, आज वही इलाका उत्तर प्रदेश में दूध क्रांति का नया गढ़ बन चुका है। इस बड़े बदलाव की सबसे खास बात यह है कि इसकी असली कमान ग्रामीण महिलाओं के हाथों में है। जो महिलाएं कल तक सिर्फ घर-परिवार संभाला करती थीं, आज वे सफल डेयरी कारोबारी बनकर दूसरों को रास्ता दिखा रही हैं। इन्हीं महिलाओं की ताकत का जश्न मनाने और उन्हें तकनीक व बाजार से जोड़ने के लिए 11 सितंबर 2026 को झांसी में एक विशाल क्षेत्रीय डेयरी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

लखनऊ के जश्न से झांसी के मैदान तक
हाल ही में उत्तर प्रदेश डेयरी विभाग ने अपने 50 साल पूरे होने के अवसर पर लखनऊ में ‘दुग्धामृत स्वर्ण महोत्सव’ मनाया था। उसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब झांसी, चित्रकूट और कानपुर मंडल के पशुपालकों को एक मंच पर लाने की तैयारी है। इस कॉन्क्लेव का मुख्य मकसद गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना, पशु प्रबंधन की आधुनिक तकनीक सिखाना और दूध के बने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारना है।
देखभाल करने वाली हाथों में अब बिजनेस की कमान
उत्तर प्रदेश की डेयरी कमिश्नर धनलक्ष्मी के. (2000 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी) के अनुसार, भारतीय ग्रामीण समाज में महिलाएं हमेशा से ही घर और पशुओं की देखभाल का मुख्य सहारा रही हैं। चारा देने से लेकर मवेशियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने तक, सब कुछ उनके दैनिक जीवन का हिस्सा था। अब वही महिलाएं केवल काम करने वाली नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने इस पारंपरिक काम को एक बड़े व्यापार में बदल दिया है।
‘लखपति दीदी’ से ‘करोड़पति दीदी’ बनने का सपना
इस क्षेत्र में हुए बदलाव के आंकड़े बेहद दिलचस्प हैं:
- 70% से अधिक भागीदारी: डेयरी सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों में 70 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं हैं।
- महिलाओं के अपने संस्थान: राज्य में 9 ऐसी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां (MPCs) हैं जिनका पूरा संचालन और मालिकाना हक सिर्फ महिलाओं के पास है।
- राष्ट्रीय आय में योगदान: डेयरी से होने वाली कमाई ने हजारों महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बना दिया है और अब वे ‘करोड़पति दीदी’ बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं।
- ग्लोबल मार्केट पर नज़र: ये महिला समूह अब केवल कच्चा दूध बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेयरी प्रोसेसिंग उद्योग में कदम रखकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपने ब्रांडेड उत्पाद पहुंचाने की तैयारी में हैं।
सरकारी योजनाओं से मिल रहा महिला उद्यमियों को बढ़ावा
महिलाओं के इस जज्बे को और मजबूती देने के लिए राज्य सरकार ने भी अपनी नीतियों का रुख पूरी तरह उनकी ओर मोड़ दिया है। ‘नंद बाबा दुग्ध मिशन’ के तहत चलने वाली योजनाओं जैसे—मुख्यमंत्री गोसंवर्धन योजना, मिनी नंदिनी, नंदिनी कृषि समृद्धि योजना और प्रगतिशील किसान योजना में कम से कम 50 प्रतिशत लाभार्थी महिलाओं को ही चुना जा रहा है। इसके अलावा, यूपी डेयरी विकास और दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति 2022 के माध्यम से अपना प्रोसेसिंग प्लांट या डेयरी यूनिट लगाने वाली महिला उद्यमियों को सब्सिडी में पहली प्राथमिकता दी जा रही है।
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