झांसी से उठी श्वेत क्रांति की नई लहर: 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के सपने को पंख लगाता ‘डेयरी कॉन्क्लेव 2026’

Dairy Conclave- स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम (स्वदेशी उन्नत गोवंश, समृद्ध निवेश, सुरक्षित भविष्य, खुशहाल उत्तर प्रदेश) का दिनांक 11 सितम्बर 2026 को दीन दयाल आडिटोरियम, झांसी में आयोजन

उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण जनजीवन में खुशहाली लाने के उद्देश्य से राज्य के डेयरी सेक्टर में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए 11 सितंबर 2026 को झांसी के दीनदयाल ऑडिटोरियम में ‘स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’ (डेयरी कॉन्क्लेव) का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। मेरठ, आगरा और बरेली में मिली ऐतिहासिक सफलता के बाद बुंदेलखंड की इस पावन धरती पर जुटे 1,000 से अधिक पशुपालकों, किसानों और नए उद्यमियों के अपार उत्साह ने यह साबित कर दिया कि राज्य में स्वदेशी गोपालन और दुग्ध उत्पादन अब मात्र जीविकोपार्जन नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक बदलाव का जरिया बन चुका है।

सब्सिडी और निवेश से बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था

इस समागम की सबसे बड़ी खासियत धरातल पर उतरता आर्थिक सहयोग रहा। ‘नंद बाबा दुग्ध मिशन’ के जरिए झांसी, कानपुर और चित्रकूट धाम मंडल के लगभग 1,200 लाभार्थियों के बैंक खातों में 11 करोड़ रुपये (1,100 लाख) से अधिक की अनुदान राशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजी गई। साथ ही, राज्य की नई दुग्ध नीति के तहत इन क्षेत्रों की विभिन्न परियोजनाओं के लिए 13.5 करोड़ रुपये (1,350 लाख) का फंड जारी किया गया।

निवेश के मोर्चे पर भी प्रदेश एक नया रिकॉर्ड बना रहा है; जहां पूरे उत्तर प्रदेश में दुग्ध विकास विभाग को कुल 28,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, वहीं केवल इन तीन मंडलों से ही 190 करोड़ रुपये से अधिक का पूंजी निवेश आ चुका है (जिसमें कानपुर मंडल से 171 करोड़, झांसी से 15 करोड़ और चित्रकूट धाम से 4 करोड़ रुपये शामिल हैं)।

सरकार की सोच: सिर्फ दूध उत्पादन नहीं, वैल्यू एडिशन पर जोर

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने राज्य के विज़न को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार का ध्यान केवल दूध का उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। असली लक्ष्य दुग्ध प्रसंस्करण (processing), वैल्यू एडिशन और एक मजबूत कोल्ड चेन नेटवर्क स्थापित करना है, ताकि गांव-गांव के युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार मिल सके।

वहीं, दुग्ध आयुक्त श्रीमती धनलक्ष्मी के. ने पशुपालकों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार किसानों को पारदर्शिता के साथ उचित मूल्य और पक्का बाजार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्वदेशी नस्लों के संरक्षण को एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

जमीनी तकनीक, सफल गाथाएं और सहकारिता को बढ़ावा

कॉन्क्लेव में केवल नीतियां ही तय नहीं हुईं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। बांदा कृषि विश्वविद्यालय, आर.एल.बी.सी.यू. झांसी और पशुचिकित्सा कॉलेज के विशेषज्ञों ने आधुनिक पशुपालन पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं, वहीं सफल डेयरी उद्यमियों ने अपनी सफलता की कहानियां सुनाकर दूसरों को प्रेरित किया।

कार्यक्रम में एक बड़ा मील का पत्थर तब देखने को मिला जब 22 नई बहुउद्देशीय दुग्ध सहकारी समितियों के गठन के बाद उन्हें आधिकारिक निबंधन प्रमाण पत्र सौंपे गए। इसके अलावा पराग, बलिनी, नमस्ते इंडिया, भोले बाबा, सामर्थ्य और इंडियन बैंक जैसे प्रमुख संस्थानों के स्टालों पर आधुनिक डेयरी उपकरणों और सेवाओं का जीवंत प्रदर्शन किया गया। डिजिटल माध्यम (यूट्यूब और वेबकास्ट) से जुड़कर राज्य के कोने-कोने से हजारों किसानों ने इस आयोजन का सीधा लाभ उठाया।

इस विशाल आयोजन को सुचारू और सफल बनाने में वित्त नियंत्रक श्री अरविंद कुमार सिंह और मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी श्री ए.पी. सिंह समेत पूरी प्रशासनिक टीम की सराहनीय भूमिका रही। झांसी की धरती से शुरू हुआ यह संवाद अब उत्तर प्रदेश को देश का सबसे मजबूत डेयरी हब बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रहा है।

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