शारदीय नवरात्र का पावन पर्व इस बार उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर एक अलग ही रौनक लेकर आ रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए एक खास पहल की है, जिसके तहत नवरात्र की सप्तमी से लेकर नवमी तिथि तक प्रदेश के नामी-गिरामी देवी मंदिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी। इस तीन दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल माता की आराधना करना ही नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत संदेश देना भी है।

कला और संस्कृति को बढ़ावा, स्थानीय कलाकारों को मंच
इस विशेष आयोजन की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का पूरा मौका दिया जा रहा है। हर चयनित मंदिर में क्षेत्रीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें महिला कलाकारों को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल से न केवल हमारी पारंपरिक लोक संस्कृति और देवी गीतों को नया जीवन मिलेगा, बल्कि कलाकारों की आजीविका को भी एक बेहतरीन सहारा मिल सकेगा।
प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि नवरात्र केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक जरिया भी है। सरकार चाहती है कि इन धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए हमारी सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहे और साथ ही नारी शक्ति को भी प्रोत्साहन मिले।
इन प्रमुख मंदिरों में गूंजेंगे मां के जयकारे
यह तीन दिवसीय भव्य उत्सव उत्तर प्रदेश के कई प्रतिष्ठित शक्तिपीठों और मंदिरों में आयोजित किया जा रहा है, जिनमें से कुछ प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:
- मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर (मीरजापुर)
- विशालाक्षी मंदिर (वाराणसी)
- ज्वाला देवी मंदिर (सोनभद्र)
- अलोपशंकरी देवी एवं ललिता देवी मंदिर (प्रयागराज)
- देवीपाटन धाम (बलरामपुर)
- नैमिषारण्य स्थित ललिता देवी मंदिर (सीतापुर)
- शाकुंभरी देवी मंदिर (सहारनपुर)
- चंद्रिका देवी एवं संकटा देवी मंदिर (लखनऊ)
- मां शीतला चौकिया धाम (जौनपुर)
- मां तरकुलहा देवी धाम (गोरखपुर)
इसके अलावा कौशांबी, मथुरा, औरैया, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, कानपुर, मैनपुरी, फिरोजाबाद और उन्नाव समेत कुल 26 प्रमुख मंदिरों में ये सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिससे पूरे राज्य में भक्ति और उत्सव का माहौल रहेगा।
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