इलाहाबाद हाईकोर्ट का उत्तर प्रदेश प्रशासन और चुनाव आयोग को कड़ा संदेश — 3 महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने होंगे पूरे।

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर बनी संशय की स्थिति पर अब विराम लग गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार और प्रदेश निर्वाचन आयोग को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करते हुए आगामी 90 दिनों के भीतर हर हाल में चुनाव संपन्न कराने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही अदालत ने कार्यकाल पूरा कर चुके ग्राम प्रधानों को लेकर भी एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट के इस निर्णय के अनुसार, जब तक नई पंचायत का गठन नहीं हो जाता, तब तक निवर्तमान (पूर्व) प्रधान ही प्रशासक की भूमिका में काम करते रहेंगे। अदालत के इस रुख से राज्य सरकार के उस फैसले को कानूनी मान्यता मिल गई है, जिसमें पूर्व प्रधानों को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई और फैसला
यह पूरा मामला ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद समय पर चुनाव न कराने और पूर्व प्रधानों को प्रशासक बनाने के निर्णय के खिलाफ दायर की गई 11 याचिकाओं (जिन्में 6 जनहित याचिकाएं भी शामिल थीं) से जुड़ा था। इन सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुनवाई की जा रही थी।
याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार, पंचायती राज निदेशक, जिलाधिकारी (DM), मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और जिला पंचायती राज अधिकारी (DPRO) को इसमें पक्षकार बनाया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ (Division Bench) ने राज्य सरकार के 25 मई के शासनादेश में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से इनकार कर दिया और सरकार की व्यवस्था को यथावत बनाए रखा।
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