लखनऊ: उत्तर प्रदेश को दुनिया भर के लिए एक कुशल मैनपावर हब बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र (SVPSTPZ) योजना’ को औपचारिक हरी झंडी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य मकसद प्रदेश के युवाओं को आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक तैयार करना और उन्हें देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के बेहतरीन अवसर मुहैया कराना है।

9 जोन्स में बंटेगा पूरा प्रदेश, 75 जिलों को मिलेगा लाभ
इस विशाल परियोजना के तहत राज्य के सभी 75 जिलों को शामिल करते हुए 9 अलग-अलग जोन्स बनाए जाएंगे।
हब एवं स्पोक मॉडल: प्रत्येक जोन को स्थानीय उद्योगों, बाजार की मांग और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
शुरुआती चरण: पहले चरण में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, नोएडा और झांसी जैसे प्रमुख औद्योगिक व विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में 5 बड़े स्किलिंग एंड एम्प्लॉयमेंट सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
10 से 25 एकड़ में आकार लेंगे हाई-टेक कैंपस
इन्फ्रास्ट्रक्चर: हर केंद्र की स्थापना 10 से 25 एकड़ की अतिक्रमण-मुक्त भूमि पर की जाएगी।
PPP मॉडल: इन केंद्रों का निर्माण, रखरखाव और संचालन निजी भागीदारी (DBFOOT मॉडल) और सरकारी संस्थानों के समन्वय से होगा।
बजट और फंडिंग: अगले 3 वर्षों में इस योजना पर कुल 1,725 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है, जिसमें वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) का भी प्रावधान रखा गया है।
तकनीकी ज्ञान के साथ विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण
आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले युवाओं को सिर्फ तकनीकी रूप से ही दक्ष नहीं बनाया जाएगा, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मार्केट के हिसाब से तैयार करने के लिए देशी व विदेशी भाषाओं की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इससे प्रदेश का युवा वैश्विक मंच पर सीधे प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।

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