उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के बुनियादी ढांचे को नई पहचान देते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित जेवर हवाई अड्डे का आधिकारिक नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्षों की निरंतर सेवा यात्रा के सम्मान में लिया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा संगम
यह एयरपोर्ट सिर्फ यात्रियों की आवाजाही का माध्यम नहीं, बल्कि टिकाऊ विकास और अत्याधुनिक तकनीक की मिसाल बनेगा।
- देश का पहला नेट-जीरो एयरपोर्ट: यह भारत का पहला ऐसा हवाई अड्डा होगा जो पूर्णतः शुद्ध-शून्य (Net-Zero) कार्बन उत्सर्जन के सिद्धांतों पर संचालित होगा।
- विशाल भूभाग और यात्री क्षमता: 1,300 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले इस एयरपोर्ट का ढांचा शुरुआती चरण में ही सालाना लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को सेवा देने में सक्षम है।
- दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक का संतुलन: इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करने में यह प्रोजेक्ट एक अहम भूमिका निभाएगा।
- महज 21 मिनट में दिल्ली से कनेक्टिविटी: उच्च गति वाले परिवहन साधनों की योजना के कारण दिल्ली और इस एयरपोर्ट के बीच का सफर मात्र 21 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
- एकीकृत मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब: एयरपोर्ट परिसर में ही ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर विकसित किया गया है। यहाँ यात्रियों को मेट्रो, टैक्सी, बस सेवाओं और निजी वाहनों की पार्किंग के साथ-साथ प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल का स्टेशन भी एक ही स्थान पर मिलेगा।

प्रशासनिक परिवर्तन और बुनियादी ढांचे की नई दिशा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस वार्ता में बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की साझा प्राथमिकताओं के चलते उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्ष 2017 से पहले जो प्रदेश प्रशासनिक शिथिलता और कमजोर बुनियादी ढांचे की वजह से पिछड़ रहा था, वह आज बेहतर कानून-व्यवस्था, पारदर्शी नीतियों और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बल पर देश का अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनकर उभरा है।

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