रंग लाई 10 साल की तपस्या: युवाओं का पलायन थमा, अब दुनिया आ रही लखनऊ! जानिए कैसे दुनिया के युवाओं की पहली पसंद बन रहा लखनऊ

एक जमाना था जब ‘मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं’ सिर्फ एक जुमला लगता था—सड़कों पर अव्यवस्था का माहौल था, बिजली कुछ चुनिंदा परिवारों तक सीमित थी और पढ़ाई पूरी करते ही युवाओं को हाथ में डिग्री थामे दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु का रुख करना पड़ता था। लेकिन पिछले दस सालों में इस शहर की कहानी में एक बड़ा मोड़ आया है। आज वही लखनऊ देश और दुनिया के प्रतिभावान युवाओं के लिए करियर का नया ठिकाना बन चुका है।

एचसीएल (HCL) की 10वीं वर्षगांठ के खास मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘HCL IT सिटी फेस-2’ का शुभारंभ किया और उत्तर प्रदेश के इस बदलते मिज़ाज की पूरी तस्वीर सामने रखी।

1. आईटी सर्विसेज से आगे: अब ‘डीप टेक’ और एआई का जमाना

लखनऊ अब सिर्फ कॉल सेंटर या बुनियादी आईटी सेवाओं तक सीमित नहीं रहने वाला। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाले दशक में शहर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी और डीप टेक टेक्नोलॉजी का बड़ा केंद्र बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश के पास दो सबसे बड़ी ताकतें हैं—यहाँ की उपजाऊ मिट्टी और दुनिया की सबसे ऊर्जावान युवा वर्कफोर्स। जब इस युवा प्रतिभा को सही मंच मिलता है, तो परिणाम वैश्विक स्तर पर दिखने लगते हैं।

2. पलायन पर लगा ब्रेक, अब उल्टा बहाव जारी

दस साल पहले स्थिति यह थी कि उत्तर प्रदेश का युवा अवसर तलाशने के लिए हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों की ओर दौड़ता था। मगर आज तस्वीर बिल्कुल उलट है। अब यूपी के युवाओं को अपना घर छोड़कर जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है, बल्कि दुनिया भर के प्रोफेश्नल्स काम की तलाश में लखनऊ आ रहे हैं। एचसीएल और लखनऊ का यह 10 सालों का साझा सफर इसी भरोसे का प्रतीक है।

3. खौफ के साए से बाहर निकली रातें, सुरक्षित हुआ माहौल

विकास की नींव हमेशा शांति और सुरक्षा पर टिकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब अराजक तत्व पुलिस के लिए सिरदर्द बने रहते थे, लेकिन आज कानून का राज है। इसका सबसे बड़ा असर कार्यबल (workforce) पर पड़ा है—आज प्रदेश की बेटियां और बहनें रात की शिफ्ट में भी बिना किसी हिचकिचाहट के काम कर रही हैं और पूरी सुरक्षा के साथ घर लौटती हैं। अपराधियों में कानून का डर साफ दिखता है।

4. पहचान और रोजगार का संकट हुआ खत्म

अतीत की अव्यवस्थाओं, बिजली के संकट और माफिया राज की तुलना करते हुए यह बात रेखांकित की गई कि आज का उत्तर प्रदेश अपनी पुरानी कमजोरियों से उबर चुका है। अब यहाँ न तो पहचान का संकट है और न ही अवसरों की कमी। सरकार द्वारा पिछले साढ़े नौ वर्षों में लगभग 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियों से जोड़ा जा चुका है, जो इस बात का सबूत है कि प्रदेश अब विकास की पटरी पर तेजी से दौड़ रहा है।

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