रायबरेली में दिव्यांग यात्रियों की यात्रा को अधिक सुविधाजनक और आधुनिक बनाने के लिए एक डिजिटल पहल की शुरुआत की है। इस व्यवस्था के लागू होने से अब यात्रियों को अपने साथ कागजी दस्तावेज या प्रमाण पत्रों की फोटोकॉपी ले जाने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।

डिजिटल सत्यापन से मिनटों में मिलेगा टिकट
नई प्रणाली के तहत, बसों में सफर के दौरान यात्रियों को अपना ‘डिजिटल दिव्यांग कार्ड’ (UDID) बस परिचालक को दिखाना होगा। परिचालक ई-टिकटिंग (एटीएम) मशीन की मदद से कार्ड पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे। कोड स्कैन होते ही यात्री की पात्रता और विवरण का सत्यापन तुरंत हो जाएगा। सही जानकारी मिलने पर परिचालक शून्य रुपये (Zero Fare) का बस टिकट जारी कर देगा।
फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम, पात्रों को मिलेगा सीधा लाभ
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (ARM) आदित्य प्रकाश ने जानकारी दी कि सरकार के नियमानुसार 40 फीसदी या उससे अधिक दिव्यांगता वाले नागरिक ही इस मुफ्त परिवहन सेवा के योग्य हैं। क्यूआर कोड आधारित इस व्यवस्था से जहां एक तरफ यात्रियों का समय बचेगा और सफर आसान होगा, वहीं दूसरी तरफ फर्जी दिव्यांग कार्ड बनाकर यात्रा करने वाले लोगों पर भी प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सकेगी।
-रवि शंकर सिंह, संवादाता, रायबरेली
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