राज्य सरकार के अनुसार, वर्ष 2017 से पहले किसी भी भर्ती का विज्ञापन निकलते ही युवाओं के मन में धांधली और पक्षपात का डर बैठ जाता था। योग्य और मेहनती होने के बावजूद गरीब व बिना सिफारिश वाले अभ्यर्थियों के हाथ निराशा ही आती थी। इस पुरानी व्यवस्था को ध्वस्त कर अब तक लगभग साढ़े नौ लाख मेधावी युवाओं को बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के सरकारी सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी पूर्ववर्ती व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले पदों के हिसाब से दरें तय होती थीं, जबकि वर्तमान में केवल योग्यता ही चयन का एकमात्र आधार बनी है।
गांवों का कायाकल्प: ‘ग्राम पंचायत भवन’ से ‘ग्राम सचिवालय’ तक
ग्रामीण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं:
- डिजिटल सुविधाएं: पारंपरिक पंचायत घरों को अब ‘ग्राम सचिवालय’ के रूप में अपग्रेड कर दिया गया है। इनमें प्रधान, सचिव, लेखपाल, बीसी सखी और पंचायत सहायकों के बैठने के स्थान के साथ-साथ वाई-फाई, डिजिटल लाइब्रेरी और कॉन्फ्रेंस हॉल उपलब्ध कराए गए हैं।
- दस्तावेज बनाना हुआ आसान: जन्म, जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र जैसे आवश्यक कागजातों के लिए अब ग्रामीणों को तहसील या ब्लॉक के चक्कर नहीं लगाने पड़ते; यह सेवाएं अब सीधे गांव में ही मिल रही हैं।
- वित्तीय प्रोत्साहन: पंचायतों को अपनी जमीनों, दुकानों व जलाशयों का व्यावसायिक उपयोग कर स्वयं का राजस्व बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अपनी आय में बढ़ोतरी करने वाली पंचायतों को सरकार की ओर से उतनी ही अतिरिक्त अनुदान राशि देने का प्रावधान किया गया है।
सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था
प्रदेश की आर्थिक और सुरक्षा स्थिति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले विभिन्न जनपदों में माफियाओं की समानांतर सत्ता चलती थी और त्योहारों से ठीक पहले उपद्रव की स्थिति बन जाती थी। सरकार की सख्त नीतियों के चलते राज्य अब उपद्रव, माफिया और कर्फ्यू के दौर से पूरी तरह बाहर आ चुका है।
इसी शांतिपूर्ण माहौल का नतीजा है कि कभी देश के सबसे पिछड़े राज्यों की सूची में शामिल उत्तर प्रदेश आज देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य की प्रति व्यक्ति आय, कुल बजट और अर्थव्यवस्था का आकार तीन गुना बढ़ा है।

क्षेत्रीय समानता और युवाओं से आह्वान
राजनीतिक आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों की प्राथमिकताएं सीमित थीं और उनके लिए विकास का मतलब केवल एक खास क्षेत्र ‘सैफई’ तक सीमित था। उस दौर में गरीबों के लिए आने वाली केंद्रीय आवास और शौचालय जैसी योजनाओं को भी राजनीतिक लाभ-हानि के चक्कर में रोक दिया जाता था।
शहीद सरदार भगत सिंह के बलिदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने नवचयनित युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा और क्षमता का उपयोग आत्मनिर्भर व विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में लगाएं।
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