एक दौर था जब बुंदेलखंड की प्यास बुझाने के लिए रेलगाड़ियों के जरिए पानी पहुंचाना पड़ता था। बांदा के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बस बारिश की दुआ मांगते थे। अगर बादल मेहरबान हुए तो ठीक, वरना फसल सूखने के साथ-साथ परिवार पालने का संकट भी खड़ा हो जाता था। पानी की इसी किल्लत से तंग आकर कई किसान तो अपनी मिट्टी छोड़कर पलायन करने पर मजबूर हो गए थे।

लेकिन आज बांदा के मटौंध इलाके की फिज़ा पूरी तरह बदल चुकी है। जो खेत कभी बंजर होने की कगार पर थे, आज वहां हरियाली मुस्कुरा रही है।
फसलें भी वही, जमीन भी वही… बस बदल गई कमाई!
पानी का इंतजाम होते ही किसानों की जिंदगी में कितना बड़ा फर्क आया है, यह उनके बैंक खातों को देखकर साफ समझा जा सकता है। पहले जहां बारिश के भरोसे की जाने वाली खेती से बमुश्किल 15 से 50 हजार रुपये निकल पाते थे, वहीं आज किसान 2 से 3 लाख रुपये का मुनाफा बना रहे हैं। थोड़े बड़े रकबे वाले किसान तो एक ही फसल से 5 से 6 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। गेहूं, धान, सरसों, चना और अरहर जैसी फसलें अब किसानों को मायूस नहीं करतीं।
क्या है यह ‘जादुई’ तरीका?
इस बड़े बदलाव की नींव रखी है उत्तर प्रदेश सरकार की ‘खेत-तालाब योजना’ ने। इसका सीधा और सरल नियम है—“खेत का पानी, खेत में ही सहेजो।”
किसान अब अपनी ही जमीन पर छोटे-छोटे तालाब तैयार कर रहे हैं। मानसून के दौरान जब बारिश होती है, तो पानी बहकर बेकार होने के बजाय इन तालाबों में जमा हो जाता है। जब भी फसलों को सिंचाई की सख्त जरूरत होती है, किसान इसी जमा पानी का इस्तेमाल कर लेते हैं। यही नहीं, सिंचाई को और आसान बनाने के लिए स्प्रिंकलर (फव्वारा सिंचाई) और पाइप जैसी आधुनिक सुविधाओं पर भी मदद दी जा रही है।
योजना का लाभ कैसे उठाएं?
अगर कोई किसान अपने खेत में तालाब बनवाना चाहता है, तो प्रक्रिया बहुत सरल है:
- आवेदन: उत्तर प्रदेश कृषि पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है।
- सरकारी मदद: विभागीय जांच के बाद पात्र पाए जाने पर तालाब बनाने की आधी लागत (50% सब्सिडी) सरकार देती है।
- आर्थिक सहायता: किसान को अधिकतम 52,500 रुपये की छूट मिलती है, जो सीधे दो किस्तों में दी जाती है।
आंकड़े खुद बयां कर रहे हैं सफलता की कहानी
बांदा के जिलाधिकारी अमित असेरी और भूमि संरक्षण अधिकारी अभयराज के अनुसार, इस योजना ने किसानों को आत्मनिर्भर बना दिया है। बांदा जिले में अब तक 4,800 से ज्यादा किसान अपने खेतों में तालाब बनवाकर इसका फायदा उठा चुके हैं। इस साल भी 255 नए किसानों को इससे जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है।
बुंदेलखंड की धरती पर बने ये छोटे-छोटे तालाब सिर्फ बारिश का पानी नहीं रोक रहे, बल्कि किसानों के मन से खेती का डर निकालकर उनके चेहरे पर तरक्की की नई मुस्कान ला रहे हैं।
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