अलीगंज के सेक्टर डी में सोमवार दोपहर निजी कोचिंग सेंटर में आग लग गई। कुछ ही देर में लपटें विकराल हो गई। आसपास के लोगों ने सूचना दमकल को दी। मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियों ने आग बुझाने के प्रयास शुरू किए हैं। इस हादसे में 15 की मौत हो गई और कई झुलस गए हैं।

आग कैसे लगी अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। आसपास के लोगों का कहना है कि कुछ लोग अंदर फंसे हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से घटना को लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है।
कई विद्यार्थियों ने नीचे कूद कर जान बचाई। कुछ को गंभीर रूप से चोटें आयी हैं। जिस इमारत में आग लगी वहां पर पहले दो तल पर पेट शाप और गेमिंग जोन था और तीसरे तल पर कोचिंग और लाइब्रेरी थी।
सीएम योगी दिए राहत और बचाव कार्य के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने व घायलों को उचित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन को हर स्तर पर सतर्कता बरतने के भी निर्देश दिए गए हैं।

घटनास्थल पर पहुंचे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने कहा किक हमें पता चला है कि अभी सबसे ऊपरी मंजिल पर कोई नहीं है। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने अंदर जाने के लिए पहली मंजिल की एक दीवार तोड़ी है। वहां बहुत ज्यादा धुआं है। हर कमरे की तलाशी ली जा रही है। हमारी प्राथमिकता सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना है। प्रशासन और मेडिकल टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
योगी आदित्यनाथ ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए
सीएम योगी ने मंच पर कहा, ‘मेरी हार्दिक इच्छा थी कि आज मैं अलीगढ़ में रहूं, लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अभी अभी मुझे जानकारी मिली है कि लखनऊ में एक अग्निकांड की दुखद घटना हुई है. उसकी चपेट में कुछ बच्चे आए हैं. उनकी दुखद मौत हुई है, इसलिए मुझे तत्काल वापस जाना पड़ रहा है. जिन्होंने जान खोई, उनके परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं. इस पूरे मामले के लिए पुलिस महानिदेशक व अपर मुख्य सचिव गृह को भी कहा है कि मौके पर जाकर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें. मैं स्वयं भी वहां प्रस्थान कर रहा हूं, जिससे इस पूरे मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दी जा सके और उन पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त कर सकें!’

लपटों में घिरी इमारत और पुलिस से अपने फंसे हुए बेटे तक जाने देने की भीख मांग रही मां…। दूसरी तरफ धुएं से भरी इमारत के अंदर से मदद के लिए बेतहाशा फोन कर रहे लोग।
आग की लपटों ने इमारत को अपनी चपेट में लेना शुरू किया तो आपातकालीन सेवाओं के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने मोर्चा संभाल लिया था। भीषण आग में फंसे लोगों को बचाने के लिए बचाव दल के साथ लोग जी-जान से जुटे थे।
कांच के शीशे तोड़ने की कोशिश की
अलीगंज में भीषण अग्निकांड के चश्मदीदों ने बताया कि कई लोगों ने इमारत के कांच के शीशे तोड़ने की कोशिश की ताकि घना धुआं बाहर निकल सके और अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलने के रास्ते बन सकें। अंदर फंसे लोगों में से कई छात्र थे जो गर्मियों की छुट्टियों में एनिमेशन सीखने आए थे।
चश्मदीदों ने बताया कि इमारत के अंदर छात्रों को फंसा देखकर कई लोगों ने मदद की कोशिश की। इमारत के बाहर दर्दनाक दृश्य देखने को मिले क्योंकि अंदर फंसे लोगों से मदद की पुकार मिलने के बाद माता-पिता और रिश्तेदार घटनास्थल की ओर दौड़े। कुछ महिलाएं पुलिसकर्मियों से इमारत के भीतर जाने देने की मिन्नतें कर रही थीं।
रोते हुए गुहार लगा रही थी महिला
एक महिला अधिकारियों से रोते हुए गुहार लगा रही थी, मुझे जाने दो अपने बेटे के पास। बचाव कार्य में शामिल होने वालों में लांस नायक छबि राम भी थे, जो आगरा में तैनात हैं और वर्तमान में लखनऊ मुख्यालय से जुड़े हैं। वे वहां से गुजर रहे थे तभी उन्होंने आग देखी। सबसे भयावह पलों में से एक दृश्य तब कैमरे में कैद हुआ, जब एक छात्र आग की लपटों से बचने के लिए ऊपरी मंजिल से कूद गया।
वहीं, नीचे खड़े लोगों ने उसकी गिरावट के प्रभाव को कम करने के लिए तुरंत गद्दे जैसी कोई चीज फैला दी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत छात्र को वहां से हटाया और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की।
पर काबू पाने की कोशिशों में जुटे थे दमकलकर्मी
छविराम ने कहा कि उनके पेशेवर अनुभव को देखते हुए अधिकारियों ने उन्हें बचाव कार्य में शामिल किया। जहां एक तरफ दमकलकर्मी आग पर काबू पाने की कोशिशों में जुटे थे, वहीं पड़ोसी इमारतों के निवासी भी मदद के लिए आगे आए। प्रभावित इमारत के पीछे रहने वाले लोगों ने बचाव कार्य में लगे दमकलकर्मियों को पानी की बोतलें पहुंचाईं।
फोन आने के बाद घटनास्थल पर पहुंचे
दमकलकर्मी बगल की इमारत तक पहुंचे और ऊपरी मंजिलों से प्रभावित इमारत में प्रवेश करने के लिए दो रास्ते बनाए, जिसके बाद अंदर से गहन खोज और बचाव अभियान जारी रखा गया। धीरज मेहरा अपने सहकर्मी आदित्य श्रीवास्तव (जो तीसरी मंजिल पर गेमिंग जोन में थ्री डी आर्टिस्ट के रूप में काम करते हैं) का फोन आने के बाद घटनास्थल पर पहुंचे।
मेहरा ने बताया, उसने मुझे फोन करके कहा बचा लो, और मैं तुरंत मौके पर भागा। सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अनुराग पंडित ने कहा कि वे केवल अंदर फंसे लोगों की सलामती के लिए प्रार्थना ही कर सकते थे।
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