रामनगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर के खजाने और चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) 15 जून 2026 को अयोध्या पहुंची। टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से छह घंटे तक पूछताछ की और डिजिटल साक्ष्य खंगाले।
सूत्रों के अनुसार, इस सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई करोड़ रुपये हो सकती है। जांच में पता चला है कि टिन्नू के पास अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्तियां हैं। वह कभी ऑटो रिक्शा चलाता था। अयोध्या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास उसका एक 70 कमरों वाला छात्र छात्रावास भी है। एसआईटी जल्द ही इस छात्रावास की भी जांच कर सकती है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विशेष जांच दल सोमवार को लगभग सात से आठ घंटे तक राम मंदिर परिसर में मौजूद रहा और मंगलवार को सुबह दस बजे से दोबारा जांच शुरू की गई। आज भी सुबह से जांच चल रही है।
अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे से जुड़े विवादों की जांच अब तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल ने आज भी मंदिर परिसर और उससे जुड़े लोगों से पूछताछ की। इस मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी व्यापक बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल जहां इसे महाघोटाला बता रहे हैं, वहीं ट्रस्ट से जुड़े लोग आरोपों को निराधार बता रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विशेष जांच दल सोमवार को लगभग सात से आठ घंटे तक राम मंदिर परिसर में मौजूद रहा और मंगलवार को सुबह दस बजे से दोबारा जांच शुरू की गई। आज भी सुबह से जांच चल रही है। जांच के दौरान राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े दस से अधिक लोगों से पूछताछ की गई। इनमें ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारी गोपाल राव सहित कई प्रमुख लोग शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि अब तक एसआईटी और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बीच किसी औपचारिक बातचीत की पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच पूरे मामले में राम शंकर उर्फ टिन्नू यादव का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उन्हें चढ़ावे की रकम से जुड़े विवाद का प्रमुख चेहरा बताया जा रहा है। एसआईटी ने टिन्नू यादव समेत छह सेवादारों से पूछताछ की है। टिन्नू यादव ने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि जिस कमरे में नकदी की गिनती होती थी, उससे उनका कोई संबंध नहीं था और उसका प्रभार दूसरे लोगों के पास था।
इसके अलावा, टिन्नू यादव की पृष्ठभूमि को लेकर भी कई दावे सामने आए हैं। बताया जाता है कि वह कभी अयोध्या की गलियों में टेंपो और आटो चलाया करते थे। स्वर्गद्वार मोहल्ले के निवासी टिन्नू के पिता नया घाट पर छोटी चाय की दुकान चलाते थे। वर्ष 1994-95 के दौरान उनकी पहचान श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण से हुई और बाद में वे उनके चालक बन गए। इसी दौरान उनका संपर्क कारसेवकपुरम और वहां सक्रिय संगठनों के प्रमुख लोगों से हुआ।
बताया जाता है कि वर्ष 1998 में टिन्नू यादव की मुलाकात चंपत राय से हुई। बाद के वर्षों में उन्होंने ट्रस्ट और कारसेवकपुरम से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2019 में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज होने के बाद उन्हें ट्रस्ट के भीतर वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में शामिल किया गया। अब आरोप लग रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि हुई है। अयोध्या, लखनऊ और बस्ती जिले में मकान, छात्रावास, खेती की जमीन और कई व्यवसायों में हिस्सेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उनकी पत्नी ने आरोपों को निराधार बताया है।
कौन हैं टिन्नू यादव?
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू चंपत राय के ड्राइवर हैं. इनके पास अयोध्या में करोड़ों की जमीन और संपत्ति होने की बात कही जा रही है. हालांकि अभी तक इस केस में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है.लेकिन चढ़ावे की चोरी के आरोपों की तीन शिकायतें जरूर दर्ज हो चुकी हैं. अयोध्या थाने में कारसेवक संतोष दुबे ने शिकायत दी है. संतोष दूबे वो हैं जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में गोलियां खाईं थीं.
आरोप है कि राम मंदिर से 5 से साढ़े 7 करोड़ रुपए तक की चोरी की गई और ये चोरी लंबे वक्त की हो रही थी. सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज तक डिलीट करवा दिये गये थे. इस पूरे केस में पूरा राममंदिर ट्रस्ट मैनेजमेंट संदेह के घेरे में है. लेकिन जिन चार किरदारों पर सबसे ज्यादा उंगलियां उठ रही हैं वो राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव, मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्र और चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव, जिन्हें चंदा चोरी का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है
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