राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के दावों पर विवाद छिड़ गया है। मंदिर ट्रस्ट ने ऐसे आरोपों से इनकार किया है, जबकि पुलिस ने भी संबंधित गिरफ्तारी की खबरों को गलत बताया है
अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि में गड़बड़ी सामने आई है और अदालत से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने ऐसे आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि फिलहाल किसी गबन या हिरासत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह मामला देश और दुनिया भर के भगवान राम के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा और सरकार की चुप्पी सवाल खड़े करती है। उन्होंने न्यायिक जांच और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तथ्यों की पुष्टि की मांग भी की।
ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर में दान और वित्तीय प्रबंधन की प्रक्रिया तय नियमों के तहत संचालित होती है और चढ़ावे की गिनती बैंक कर्मचारियों व ट्रस्ट प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की जाती है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब कुछ मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि मंदिर परिसर में दानपात्र की गिनती के दौरान कथित अनियमितता सामने आई और चार लोगों को हिरासत में लिया गया। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि ट्रस्ट से जुड़े एक अधिकारी को कार्यमुक्त किया गया है तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से दान राशि की गणना प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।
हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही किसी से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, मंदिर में दान राशि के प्रबंधन और ऑडिट से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया चल रही है तथा मीडिया में प्रसारित कुछ खबरें भ्रामक हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी आरोपों को नकारा गया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि करोड़ों रुपये गायब होने जैसी बातों में कोई सत्यता नहीं है। ट्रस्ट की ओर से अभी तक किसी वित्तीय अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने भी ट्रस्ट का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रकार के घोटाले की जानकारी नहीं है और मंदिर की पूजा, आरती तथा प्रशासनिक व्यवस्थाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। उनके अनुसार, ट्रस्ट की बैठकों और निर्णयों में पारदर्शिता बरती जाती है और अब तक किसी औपचारिक आपत्ति की जानकारी सामने नहीं आई है।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और धन संग्रह को लेकर छिड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद इस समय देश की सियासत के केंद्र में है. समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और स्थानीय नेताओं के गंभीर आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट ने भी इस पर अपनी स्थिति साफ की है.
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर कड़ी टिप्पणी करते हुए आरोपों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की।
राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा दान के लिए लगभग चार दर्जन दानपात्र स्थापित किए गए हैं। ट्रस्ट के अनुसार, इन दानपात्रों से राशि नियमित रूप से एकत्र कर अधिकृत बैंकिंग प्रक्रिया के तहत गिनी जाती है।
फिलहाल, इस मामले में कई स्तरों पर परस्पर विरोधी दावे सामने आए हैं। एक ओर विपक्ष और कुछ राजनीतिक दल स्वतंत्र जांच तथा विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट और पुलिस किसी भी कथित गबन या हिरासत की पुष्टि से इनकार कर रहे हैं। आधिकारिक जांच या दस्तावेजी निष्कर्ष सामने आने तक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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