चित्रकूट में बाढ़ से टूट गए पिछले सारे रिकॉर्ड; 16 गांवों में तबाही, अगले 72 घंटे भारी

चित्रकूट में भारी बारिश से 16 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए 700 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया. डीएम पुलकित गर्ग और एसपी अरुण कुमार सिंह ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर खुद स्थिति का जायजा लिया और राहत सामग्री का वितरण सुनिश्चित कराया.

700 लोगों का हुआ रेस्क्यू
सतना जिले के इस प्रमुख तीर्थ स्थल पर आई इस आपदा के दौरान प्रशासन की मुस्तैदी से बड़ा हादसा टल गया और पिछले 24 घंटों में 700 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित परिवारों से मिलकर सीएम ने उन्हें ढांढस बंधाया और भोजन, कपड़े व राशन जैसी आवश्यक सामग्रियां वितरित कीं। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस प्रलयकारी बाढ़ में किसी भी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन संपत्ति और घरों को भारी नुकसान पहुंचा है।

आपदा की इस घड़ी में जमीनी हकीकत और राहत कार्यों की गति जानने के लिए खुद जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ग्राउंड जीरो पर पहुंचे. दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने मोटरबोट और पैदल चलकर बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों का दौरा किया. विशेष रूप से तरौहाँ गांव, जो इस समय बाढ़ का सबसे बड़ा दंश झेल रहा है, वहां पहुंचकर अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया. प्रशासन ने पहले पूरे प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कराया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मदद की जरूरत किस-किस परिवार को है, और इसके तुरंत बाद राहत सामग्री का वितरण शुरू कर दिया गया.

चित्रकूट में मंदाकिनी और सेमरावल नदियों के उफान से बाढ़ जैसे हालात बने।
पिछले 24 घंटों में 700 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रेस्क्यू किया गया।
सीएम मोहन यादव ने खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों का पैदल दौरा कर स्थिति परखी।
सतना जिले में घर-घर सर्वे कर मुआवजा और राहत राशि देने के निर्देश दिए गए।
सुरक्षा के मद्देनजर 31 अगस्त और 1 सितंबर को सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई।

राहत सामग्री का वितरण और सुरक्षा की स्थिति

जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि प्रभावित परिवारों के बीच खाद्यान्न और जरूरी सामान बांटने का काम युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है. राशन किट में सूखा भोजन, आटा, चावल, दालें, मोमबत्ती और दवाइयां शामिल हैं ताकि लोगों को शुरुआती दिनों में कोई दिक्कत न हो. वहीं, पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि नदियों का जलस्तर लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है. स्थिति पल-पल बदल रही है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी प्रशासनिक और पुलिस टीम को हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है. प्रभावित इलाकों में पुलिस बल लगातार गश्त कर रहा है ताकि लोगों की सुरक्षा में कोई चूक न हो.

प्रशासन की अपील और आगे की सतर्कता

स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से धैर्य बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है. लोगों को सलाह दी गई है कि वे बहते हुए पानी के करीब न जाएं और जरूरत पड़ने पर तुरंत नजदीकी पुलिस या प्रशासनिक टीम को सूचित करें. सभी सरकारी विभागों को आपस में तालमेल बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं. जब तक जलस्तर पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, तब तक चौबीसों घंटे निगरानी जारी रहेगी.

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