उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी लखनऊ को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के किनारे स्थित हैदरगढ़ में एक विशाल इंडस्ट्रियल हब आकार ले रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तेजी से धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने 250 करोड़ रुपये के बजट को हरी झंडी दे दी है।

निवेशकों की पहली पसंद क्यों बन रहा है हैदरगढ़?
लगभग 241 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहतरीन कनेक्टिविटी है। एक्सप्रेस-वे से सीधे जुड़े होने के कारण यह क्षेत्र माल ढुलाई और व्यापार के लिहाज से अत्यंत सुगम हो गया है। यही कारण है कि ग्रेटर नोएडा के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार और झारखंड के बड़े उद्योगपति और निवेशक भी यहाँ अपनी मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
जमीन अधिग्रहण और बुनियादी विकास का काम तेज
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के मार्गदर्शन में इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प किया जा रहा है। परियोजना के लिए आवश्यक कुल निजी भूमि में से लगभग 70 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण आपसी सहमति से पूरा कर लिया गया है। शेष जमीनों के लिए नियमानुसार अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि निर्माण कार्य बिना किसी रुकावट के शुरू हो सके।
इस कॉरिडोर के मुख्य दायरे में क्षेत्र के कई प्रमुख गांव शामिल हैं:
- सतरही
- बम्हरौली
- पेचरूआ
- बहरामपुर
- घरकुइयां
- अन्दूऊमऊ
स्थानीय गांवों की बदलेगी तस्वीर, मिलेंगे रोजगार के नए अवसर
यह औद्योगिक कॉरिडोर न केवल प्रदेश के राजस्व को बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में भी व्यापक सुधार लाएगा। परियोजना के तहत आसपास के गांवों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर उनका भी सर्वांगीण विकास किया जाएगा। इसके चालू होने से स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के हजारों नए अवसर प्राप्त होंगे, जिससे पलायन पर रोक लगेगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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