सोचिए, जब ढलती शाम के साथ सरयू नदी की शांत लहरों पर लाखों दीयों की लौ मुस्कुराएगी, तो वह दृश्य कितना अलौकिक होगा! इस बार की दिवाली अयोध्यावासियों और दुनिया भर के रामभक्तों के लिए एक नया इतिहास रचने जा रही है। आगामी 5 से 7 नवंबर के दौरान, रामनगरी अपने 10वें ‘दीपोत्सव’ के जरिए एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

युवा हाथों में आस्था की मशाल: 34 हजार वालंटियर्स संभालेंगे कमान
इस अलौकिक सपने को धरातल पर उतारने का सबसे बड़ा जिम्मा हमारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है। लगभग 34,000 छात्र-छात्राएं और स्वयंसेवक इस पूरे महा-उत्सव की मुख्य ताकत बनेंगे। घाटों की सीढ़ियों पर करीने से दीए सजाने से लेकर उन्हें एक साथ रोशन करने और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करने तक, हर मोड़ पर ये वालंटियर्स मुस्तैद रहेंगे। प्रशासन ने इन सभी युवाओं के ठहरने, भोजन और प्रशिक्षण का ऐसा पुख्ता इंतजाम किया है कि वे इस गौरवशाली क्षण का हिस्सा पूरे उत्साह के साथ बन सकें।

नेपथ्य का गणित: लीटरों तेल और लाखों बातियों की तैयारी
दो किलोमीटर के लंबे दायरे में फैले घाटों को एक साथ रोशनी से नहलाना कोई मामूली बात नहीं है। इस जगमगाहट के पीछे महीनों की प्रशासनिक मेहनत छुपी है। दीयों की लौ लगातार जलती रहे, इसके लिए 65 लाख सूती बातियों, 55 हजार लीटर तेल और 150 किलो कपूर का विशाल स्टॉक जुटाया जा रहा है। श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद ने मंच निर्माण, सजावट और सामग्री जुटाने के लिए पाँच अलग-अलग टेंडर जारी कर दिए हैं, ताकि समय रहते हर व्यवस्था पूरी की जा सके।

सरयू तट से लेकर मंदिरों तक बिखरेगी अनूठी छटा
आयोजन का मुख्य केंद्र ‘राम की पैड़ी’ होगी, जहाँ एक विशाल और भव्य मंच तैयार किया जा रहा है। यहाँ देश-विदेश के कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देंगे। केवल नदी के घाट ही नहीं, बल्कि अयोध्या धाम के कोने-कोने में स्थित ऐतिहासिक मंदिरों को चमचमाती एलईडी लाइट्स और महकते फूलों से सजाया जा रहा है। रात के अँधेरे में जब सरयू का तट दीयों से जगमगाएगा, तो ऐसा लगेगा मानो पूरा ब्रह्मांड रामनगरी को प्रणाम करने उतर आया हो।
सुगम, सुरक्षित और स्वच्छ अयोध्या का संकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देखरेख में आयोजित हो रहा यह दीपोत्सव सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह अयोध्या के पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव का नया चेहरा भी है। लाखों की संख्या में पहुँचने वाले पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा, स्वच्छता और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
टेंडर की कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही सामग्री की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी और वालंटियर्स की ट्रेनिंग अंतिम दौर में है। आज अयोध्या का यह दीपोत्सव केवल भारत में ही नहीं, बल्कि सरहदों के पार भी अपनी पहचान बना चुका है—और इस नवंबर रामनगरी एक बार फिर से इस जादुई अनुभव का गवाह बनने जा रही है।

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