उत्तर प्रदेश की सड़कों पर अब नियमों को तोड़ने वालों और बेपरवाह ड्राइविंग करने वालों की मनमानी नहीं चलेगी। ट्रैफिक मैनेजमेंट को स्मार्ट और सख्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के बेड़े में 87 नई हाई-टेक इंटरसेप्टर गाड़ियां तैनात कर दी गई हैं। लखनऊ के लोकभवन से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन आधुनिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर सड़कों पर सुरक्षा का नया दौर शुरू किया।

आधुनिक पुलिसिंग का ज्ञानकोष: ‘संघर्ष’ किताब का लोकार्पण
इस खास मौके पर सिर्फ गाड़ियां ही नहीं उतारी गईं, बल्कि महकमे में आए बड़े बदलावों को बयां करती एक खास किताब ‘संघर्ष’ का विमोचन भी हुआ।
यह पुस्तक यूपी पुलिस के शीर्ष अफसरों के जमीनी तजुर्बों, दैनिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे आधुनिक पुलिस सुधारों की केस स्टडीज का एक विस्तृत दस्तावेज है। इसका उद्देश्य पुलिस तंत्र को रणनीतिक और तकनीकी रूप से अधिक निपुण बनाना है।
जान पर खेलकर कानून की रक्षा करने वाले 10 नायकों को नमन
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और गौरवशाली क्षण वह था जब मुख्यमंत्री ने राज्य के 10 जांबाज पुलिसकर्मियों के सीने पर ‘वीरता पदक’ सजाया। अपनी जान की परवाह किए बिना अपराधियों से लोहा लेने वाले इन रणबांकुरों के शौर्य को पूरे प्रदेश ने सराहा:
- बुलंदशहर: इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह राठौर
- स्पेशल टास्क फोर्स (STF): इंस्पेक्टर अमित, सब-इंस्पेक्टर केशव शांडिल्य, सब-इंस्पेक्टर घनश्याम यादव, सब-इंस्पेक्टर राहुल कुमार, हेड कांस्टेबल रणधीर सिंह और कांस्टेबल अमित त्रिपाठी
- मथुरा: सब-इंस्पेक्टर अजय कुमार वर्मा
- गाजियाबाद: इंस्पेक्टर मनीष बिष्ट
- मैनपुरी: सब-इंस्पेक्टर अवनीश कुमार त्यागी
मजबूत कानून-व्यवस्था से बढ़ता जन-विश्वास
लोकभवन में आयोजित यह समारोह सिर्फ पुरस्कार देने तक सीमित नहीं था; यह संदेश था कि उत्तर प्रदेश सुरक्षा और आधुनिकता के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक तरफ जहां जांबाज जवानों को सम्मानित कर उनके हौसले को नई उड़ान दी गई, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक इंटरसेप्टर गाड़ियों के जुड़ने से सड़कों पर अनुशासन और अपराधियों में कानून का खौफ और अधिक मजबूत होगा।
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