महीनों की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद जब खेत लहलहा उठे थे और फसलें कटाई के मुहाने पर खड़ी थीं, तभी कुदरत की एक मार ने रायबरेली के हजारों अन्नदाताओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं ने पककर तैयार खड़ी धान की फसलों को जमीन पर बिछा दिया है। खेतों में पानी भरने से बालियों के काले पड़ने और फसल के सड़ने का गंभीर संकट पैदा हो गया है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, अगेती धान की कम से कम एक-चौथाई (25%) उपज नष्ट होने की कगार पर है, वहीं उड़द और तिल की खेती को भी भारी चोट पहुँची है।

रायबरेली जिले में इस सीजन में करीब 1,60,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की गई थी। इनमें महराजगंज, ऊंचाहार, हरचंदपुर, बछरावां, अमावां और जगतपुर ऐसे इलाके हैं जहाँ बड़े पैमाने पर अगेती धान बोया जाता है। बारिश का सबसे तीखा असर इन्हीं क्षेत्रों में देखा जा रहा है। महराजगंज तहसील के कुसुड़ी सागरपुर गाँव के किसान राज बहादुर, शिव किशोर और रामसमुझ बताते हैं कि फसल पूरी तरह पक चुकी थी, लेकिन इस बेमौसम आफत ने सब बिगाड़ दिया। अगर खेतों से पानी जल्द बाहर नहीं निकला तो बलुई जमीन की फसल पूरी तरह गल जाएगी, जिससे गुणवत्ता और पैदावार दोनों में बड़ी गिरावट आएगी।
खेती-किसानी के साथ-साथ इस मूसलाधार बारिश ने शहरी और ग्रामीण जीवन को भी अस्त-व्यस्त कर दिया है। चौथे दिन रविवार को आसमान भले ही साफ हो गया, लेकिन बस्तियों में जलजमाव की समस्या जस की तस बनी हुई है। शहर के सोनिया नगर, नया पुरवा, फातिमा नगर, आजाद नगर और गल्ला मंडी की सड़कों पर लबालब पानी भरा है। स्थानीय निवासी दिनेश यादव और संतराम वर्मा का कहना है कि घरों के बाहर पानी जमा होने से लोगों का निकलना दूभर हो गया है। बछरावां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परिसर में बने कर्मचारियों के आवासों में भी पानी भर गया। हालांकि, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) स्वर्ण सिंह ने बताया कि जलकल विभाग की टीमों को लगाकर पानी की निकासी का काम तेजी से कराया जा रहा है।
प्रशासन की ओर से राहत की पहल शुरू कर दी गई है। जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने जानकारी दी है कि प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए सर्वे कराया जा रहा है और नुकसान की समीक्षा के बाद प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा।
बीमित किसानों के लिए जरूरी सूचना: जिला कृषि अधिकारी ने फसल बीमा कराने वाले सभी किसानों को सलाह दी है कि आपदा से हुए नुकसान की शिकायत घटना के 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर 14447 पर अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं, ताकि बीमा दावे की प्रक्रिया समय पर शुरू हो सके।
-रवि शंकर सिंह, संवादाता, रायबरेली
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