महीने भर के दर्द से राहत: सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने दिया युवक को नया जीवन
रायबरेली के बछरावां में रहने वाला 32 साल का एक युवक पिछले एक महीने से पेट के असहनीय दर्द, जी मिचलाने और उल्टी की समस्या से जूझ रहा था। जब वह 9 सितंबर को लखनऊ के सिविल अस्पताल की ओपीडी में जांच के लिए पहुंचा, तो डॉक्टरों को एक हैरान कर देने वाली बात पता चली।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि उसके पेट के भीतर मौजूद पित्ताशय (गॉलब्लाडर) का आकार सामान्य से कई गुना बड़ा हो चुका था। उसमें न सिर्फ पथरी और सूजन थी, बल्कि वह गंभीर मवाद से भी भरा हुआ था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत अस्पताल में दाखिल कर लिया।
पेचीदा ऑपरेशन और डॉक्टरों की सूझबूझ अस्पताल के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया कि जब ऑपरेशन शुरू हुआ तो चुनौती अनुमान से कहीं अधिक बड़ी थी। यह पित्ताशय 26 सेंटीमीटर लंबा था और इसका वजन लगभग 450 ग्राम हो चुका था। बेहद फूला होने के कारण यह लिवर के पीछे और बड़ी आंत से बहुत मजबूती से चिपक गया था। जरा सी चूक से मुख्य पित्त नली (बाइल डक्ट) या खून की नसें कट सकती थीं।
डॉ डॉक्टरों की टीम ने ‘जेंटल डिसेक्शन’ (बेहद बारीक और सुरक्षित सर्जिकल कट) तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बड़ी सतर्कता से इस पित्ताशय को बाहर निकाला।
चिकित्सा जगत का एक दुर्लभ मामला डॉ. मिश्रा के मुताबिक, हालांकि मेडिकल किताबों में 30 सेमी तक के पित्ताशय के मामले दर्ज हैं, लेकिन 26 सेमी लंबा और 450 ग्राम वजनी पित्ताशय मिलना अपने आप में बेहद अनोखा केस है। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज अब पूरी तरह सुरक्षित है।
- सफल सर्जिकल टीम: इस जटिल सर्जरी को अंजाम देने में डॉ. विनोद कुमार वर्मा, डॉ. सचिन कुमार, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. डीके गुप्ता और ओटी असिस्टेंट डॉ. सुदेश कुमार की अहम भूमिका रही। अस्पताल के निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने पूरी टीम की पीठ थपथपाई।
- डॉक्टर की अहम सलाह: डॉ. आनंद मिश्रा ने आम जनता से अपील की है कि पेट में लगातार रहने वाले दर्द, खट्टी डकारें, अपच या पीलिया जैसी दिक्कतों को साधारण समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर ली गई डॉक्टरी सलाह किसी बड़े खतरे से बचा सकती है।

डिजिटल हेल्थ क्रांति: ई-संजीवनी से 4.5 लाख लोगों तक पहुंचा घर बैठे इलाज
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में रायबरेली एम्स ने एक और बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। एम्स में संचालित ‘ई-संजीवनी’ सेवा के सफल 2 साल पूरे होने पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इन दो वर्षों के भीतर दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के लगभग 4.50 लाख मरीजों को इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श मिला है।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन ने बताया कि ‘ई-संजीवनी’ और ‘टेली-मानस’ जैसी तकनीकों ने गांव-देहात के लोगों के लिए बड़े डॉक्टरों तक पहुंचना बेहद आसान बना दिया है। इससे मरीजों का शहर जाने का समय और पैसा दोनों बच रहा है। इस मौके पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित भी किया गया।
एम्स रायबरेली पहुंचे तेलंगाना के राज्यपाल: स्वच्छता योद्धाओं का किया सम्मान
इसी क्रम में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने खाद्य एवं रसद मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडेय के संग रायबरेली एम्स का दौरा किया और वहां की चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
सफाई मित्रों का बढ़ाया हौसला कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने एक अनोखी पहल करते हुए परिसर को स्वच्छ रखने वाले 30 सफाईकर्मियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि “2047 तक भारत को विकसित बनाने का सपना तभी पूरा होगा, जब हमारी बुनियाद यानी ‘स्वस्थ भारत’ मजबूत होगा।”
उन्होंने वहां मौजूद एमबीबीएस (MBBS) और नर्सिंग के युवा छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें देश सेवा के लिए प्रेरित किया। एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन और अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों को संस्थान के भावी प्रोजेक्ट्स और सेवाओं के विस्तार की जानकारी दी।
-रवि शंकर सिंह, संवादाता, रायबरेली
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