उत्तर प्रदेश में न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने और अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वकीलों की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास से जुड़े अनेक बड़े कदम उठाने का ऐलान किया।

1. आधुनिक तकनीक और ‘फ्यूचर रेडी’ जस्टिस सिस्टम
तकनीक के दौर में कानूनी प्रक्रियाओं को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार डिजिटाइजेशन पर विशेष जोर दे रही है:
- लॉ ऑफिसर्स को डिजिटल सपोर्ट: सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 राज्य विधि अधिकारियों को लेटेस्ट टैबलेट दिए जाएंगे, ताकि वे केस से जुड़ी जानकारी तुरंत पा सकें।
- डिजिटल अदालती कार्यवाही: जिला अदालतों और जेलों को हाई-स्पीड इंटरनेट व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया है। ‘न्याय श्रुति’ प्रणाली के माध्यम से वर्चुअल गवाही और डिजिटल दस्तावेजों की स्कैनिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- स्मार्ट पुलिस-अभियोजन तालमेल: जांच और अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाया गया है ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य और चार्जशीट समय पर अदालत में पेश की जा सकें।
- नए विषयों की समझ: साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा प्राइवेसी, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे आधुनिक कानूनी क्षेत्रों में महारत हासिल करने पर बल दिया गया है।

2. स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक संबल
वकीलों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए फैसले लागू किए गए हैं:
- 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज: हाईकोर्ट और जिला अदालतों में नियमित रूप से प्रैक्टिस करने वाले सभी सक्रिय अधिवक्ताओं को हर साल 5 लाख रुपये तक की मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।
- कल्याण निधि (Welfare Fund) में वृद्धि: अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 5 लाख रुपये कर दिया गया है।
- आश्रितों के लिए मदद: किसी अधिवक्ता के असमय निधन पर उनके परिजनों को मिलने वाली वित्तीय सहायता की पात्रता आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है।
- मानदेय में बढ़ोतरी: अदालतों में सरकार का पक्ष रखने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत से अधिक का इजाफा किया गया है।

3. बुनियादी ढांचा और सर्वसुविधायुक्त परिसर
अदालती परिसरों में काम करने के माहौल को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया गया है:
- 700 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, लाइब्रेरी, कॉमन रूम और डाइनिंग हॉल का निर्माण कराया गया है।
- इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स: किराए के भवनों में चल रही 10 जिला अदालतों के लिए एकीकृत परिसर बनाए जा रहे हैं। इनमें जजों के आवास, वकीलों के चैंबर, सस्ती कैंटीन और इंडोर खेल सुविधाएं होंगी।
- जिला स्तर पर विस्तार: कासगंज, श्रावस्ती, कौशांबी और लखनऊ समेत एक दर्जन जिलों में चैंबर निर्माण के लिए अलग से फंड दिया गया है। साथ ही मामलों के जल्द निपटारे के लिए 900 नई जिला स्तरीय अदालतों की मंजूरी दी गई है।
आम जनता का भरोसा और बार-बेंच का समन्वय
न्यायिक व्यवस्था की असली ताकत आम नागरिक का विश्वास है, जो केवल समय पर निष्पक्ष न्याय मिलने से ही संभव है। बार और बेंच को न्याय रूपी रथ के दो पहिए बताते हुए यह स्पष्ट किया गया कि सरकार और न्यायपालिका के बीच निरंतर संवाद से ही अधिवक्ताओं की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा रहा है।
इस अवसर पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने वकीलों को मिल रही नई सुविधाओं के लिए आभार व्यक्त किया और युवा अधिवक्ताओं से लोकतंत्र को मजबूत बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।
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