भारतीय अर्थव्यवस्था आज दुनिया की शीर्ष 5 ताकतों में अपनी जगह मजबूत कर चुकी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश ने पहली तिमाही में 7.8% की शानदार विकास दर हासिल की है। इसी मजबूत आर्थिक नींव के साथ केंद्र सरकार ‘इंडिया फर्स्ट’ की सोच के साथ अपनी विदेश और रक्षा नीतियों को आगे बढ़ा रही है। मुंबई में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सामाजिक, राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े कई अहम पड़ावों का खाका पेश किया।

गृह मंत्री ने सबसे बड़ा ऐलान यह किया कि साल 2029 से पहले एनडीए के शासन वाले सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) को पूरी तरह प्रभावी बना दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शादी, तलाक, वसीयत और गोद लेने जैसे निजी विषयों में धर्म से परे जाकर सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम बनाना ही इसका मुख्य उद्देश्य है। कई राज्यों में यह नियम पहले ही प्रभाव में आ चुका है, जबकि अन्य राज्यों में इसके कार्यान्वयन का काम तेज़ी से चल रहा है।
इसी कड़ी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक महीने भर का ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। इस राष्ट्रव्यापी अभियान में एनडीए के सहयोगी दलों और सामाजिक संगठनों के साथ-साथ आम जनता भी गांव और बूथ स्तर तक विभिन्न सेवा कार्यों में हिस्सा लेगी।
देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा पर बात करते हुए अमित शाह ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति बिल्कुल सख्त (‘जीरो टॉलरेंस’) है। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अनुच्छेद 370 को हटाना, नक्सलवाद पर लगाम कसना और पूर्वोत्तर भारत में शांति कायम करना सरकार की प्राथमिकता रही है।
अवैध घुसपैठ पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर देश से बाहर करने का काम जारी रहेगा। मणिपुर में एनआरसी (NRC) लागू करने के सवाल पर गृह मंत्री ने बताया कि स्थानीय राजनीतिक दलों और नेताओं के साथ बातचीत चल रही है, और आम सहमति बनते ही निर्णय की घोषणा की जाएगी।
बातचीत के अंत में उन्होंने देश की लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभाषा को प्राथमिकता देना हर नागरिक का अधिकार है और भाषा के नाम पर समाज में बंटवारा करने की कोशिशों से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जहाँ संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रखने और विरोध जताने के अधिकार का हमेशा सम्मान किया जाता है।
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