उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। चुनावी बिगुल बजने से काफी पहले ही राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतिक चालें चलनी शुरू कर दी हैं। सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष तक, हर कोई अपनी जड़ों को मजबूत करने में जुट गया है।

विपक्षी खेमे का समीकरण और सपा की तैयारी
विपक्षी गठबंधन के भीतर सीटों के गणित को लेकर मंथन की खबरें सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 328 पर खुद चुनाव लड़ने का मन बना रही है, जबकि सहयोगी कांग्रेस के लिए करीब 75 सीटें छोड़ने का फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव का मुख्य फोकस वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण और बूथ प्रबंधन पर है। पार्टी का मानना है कि नए और युवा मतदाताओं को जोड़कर ही जमीनी पकड़ को मजबूत बनाया जा सकता है।
अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी बसपा, युवाओं पर दांव
दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी ने किसी भी दल के साथ गठबंधन से साफ इनकार कर दिया है। मायावती ने स्पष्ट किया है कि बसपा पूरी तरह अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी। पार्टी इस समय अपने संगठन को निचले स्तर तक पुनर्गठित करने और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में लगी है। इसके लिए सभी जिलाध्यक्षों के साथ समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। वहीं, नए दौर के युवाओं (Gen-Z) को अपने साथ जोड़ने के लिए बसपा ने आकाश आनंद को मोर्चे पर उतारा है।
बीजेपी की हैट्रिक लगाने की रणनीति और ‘सेवा संकल्प’
सत्ता पर लगातार तीसरी बार कब्जा जमाने के इरादे से मैदान में उतरी भारतीय जनता पार्टी ‘बूथ जीत, चुनाव जीत’ के पुराने और परखे हुए मंत्र पर भरोसा जता रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद जिलों का दौरा कर सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा जनता के सामने रख रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाजपा ‘सेवा संकल्प’ अभियान चला रही है। करीब 700 वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी वाली कार्यशाला के माध्यम से जन-कल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने की योजना है। इस मुहिम में स्मृति ईरानी और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जैसे दिग्गज नेताओं की सीधी भागीदारी रहेगी।
सियासी माहौल में बढ़ी तपिश
सभी राजनीतिक दलों की प्राथमिकताएं अब बिल्कुल साफ दिख रही हैं:
- बीजेपी: सरकारी योजनाओं और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के दम पर मजबूत पकड़ बनाना।
- समाजवादी पार्टी: बूथ मैनेजमेंट सुधारना और नए मतदाताओं को अपने पाले में लाना।
- बसपा: बिना किसी गठबंधन के संगठन को नया रूप देना और युवाओं को साधना।
2027 के विधानसभा संग्राम की दिशा तय होने लगी है। आने वाले महीनों में यह राजनीतिक मुकाबला और अधिक तीव्र व दिलचस्प होने के पूरे आसार हैं।
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