राजधानी लखनऊ में कचहरी रोड पर अधिवक्ताओं के अवैध निर्माण और अवैध चैंबर्स पर नगर निगम का बुलडोजर कड़ाई से गरज रहा है. हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के आदेश और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद नगर निगम द्वारा दी गई 29 अगस्त की मोहलत खत्म हो चुकी है, जिसके बाद 30 अगस्त को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह कार्रवाई की जा रही है. यह पूरा मामला अधिवक्ताओं अनुराधा सिंह, देवांशी श्रीवास्तव और अरुणिमा श्रीवास्तव की याचिका से जुड़ा है.

सड़क, फुटपाथ और नालियों पर निर्माण का आरोप
नगर निगम की ओर से जारी नोटिस में कई चेंबरों को कथित अतिक्रमण की श्रेणी में रखा गया है. आरोप है कि कुछ निर्माण सड़क, फुटपाथ और नालियों की जमीन पर किए गए हैं. इसके अलावा कुछ स्थानों पर सरकारी जमीन पर पक्के निर्माण होने और दुकानों के संचालन की भी बात कही गई है. नगर निगम अब ऐसे निर्माणों को हटाने की तैयारी में है, जिन्हें नियमों के विरुद्ध या सार्वजनिक स्थानों पर कब्जे के रूप में चिह्नित किया गया है.
छुट्टी के दिन भी मौके पर पहुंचे वकील
संभावित कार्रवाई की आशंका के बीच बड़ी संख्या में वकील छुट्टी के दिन भी संबंधित स्थानों पर पहुंचे. चेंबरों पर नोटिस लगने और समय सीमा समाप्त होने के बाद अधिवक्ताओं के बीच यह चिंता बढ़ गई है कि नगर निगम कभी भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर सकता है. वकील अपने चेंबरों और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश में जुटे हैं. पूरे इलाके में नगर निगम की संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं.
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ लखनऊ के वकीलों ने देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी. हालांकि, वहां से अधिवक्ताओं को कोई राहत नहीं मिल सकी. इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देशानुसार नगर निगम ने अवैध निर्माण खुद हटाने के लिए 29 अगस्त तक की अंतिम मोहलत दी थी. यह मियाद पूरी होने के ठीक बाद 30 अगस्त को नगर निगम का बुलडोजर एक्शन में आ गया.
इसके अलावा निबंधन कार्यालय के सामने नाले पर हुए अवैध निर्माण भी शामिल थे। दरअसल कोर्ट ने नगर निगम के अधिकारियों से कहा था कि एक सप्ताह के भीतर सभी 72 अतिक्रमणकारियों को दोबारा नोटिस तामील कराया जाए। यदि कोई नोटिस लेने से इनकार करते हैं तो संबंधित अतिक्रमित स्थल पर उसे चस्पा किया जाए। साथ ही नोटिस का प्रकाशन एक हिंदी और एक अंग्रेजी समाचार पत्र में कराया जाए। इसके बाद कब्जेदारों को 10 दिन का समय दिया जाए।
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