लखनऊ। जैसे जैसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव की तारीख करीब आ रही है,वैसे वैसे चुनावी तापमान बढ़ता हुआ अपने चरम पर आ रहा है। जहां एक ओर मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार-निर्वाचन आयोग,भारत सरकार आज प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने दो दिवसीय प्रवास पर आये हुए हैं तो वहीं “राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी” के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेर सिंह राणा भी लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के माध्यम से अपनी सियासी जमीन को मज़बूत करने के लिए प्रयासरत दिखे।

लखनऊ में प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए शेर सिंह राणा ने अपनी तथा पार्टी की चुनावी तैयारियों और रणनीति पर विस्तार पूर्वक चर्चा करी।
हमारी पार्टी 2027 में लगभग 100 सीटों पर चुनाव लडेगी जिसमें से ज्यादातर पश्चिम उत्तर प्रदेश से हैं।
शेर सिंह राणा ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा की उनकी पार्टी की स्थापना 2019 में हुई थी,पार्टी का आधार उत्तर प्रदेश,राजस्थान,मध्यप्रदेश, दिल्ली,उत्तराखंड,हरियाणा तथा बिहार प्रदेश में मुख्य रूप से है और इन सभी प्रदेशों में उनकी पार्टी एक बार चुनाव लड़ चुकी है। उ.प्र. तथा उत्तराखंड में यह उनका दूसरा चुनाव है।
हमारी पार्टी के 7 जिला पंचायत सदस्य हैं उत्तर प्रदेश और हरियाणा में। अतः अब हमारा प्रयास विधान सभा में अपनी उपस्थित दर्ज कराने की है,जिसके लिए हम प्रयासरत हैं।
आर.जे.पी. की राजनैतिक शक्ति अब इतनी बन चुकी हैं कि हम किसी भी प्रकार से बी.जे.पी. को सत्ता में रोकने में सक्षम है। पार्टी को मिलने वाला जनसमर्थन वोटों के गणित को प्रभावित करने की हैसियत में आ गया है।
उत्तराखंड के हरिद्वार परिक्षेत्र में पार्टी काफी मजबूती से चुनावी तैयारी में लगी है। पिछले चुनाव उत्तराखंड की तीन ऐसी सीटें थीं जिसमें हमारी पार्टी को मिले वोटों की वजह से भाजपा को हार मिली थी। हम चाहेंगे की कांग्रेस पार्टी से हमारा गठबंधन हो किन्तु यदि यह संभव ना हुआ तो राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी या अन्य विकल्पों पर विचार करेगी।
गठबंधन के प्रश्न पर श्री राणा ने स्पष्ट कहा कि हम हर उस गठबंधन का हिस्सा बनने को तैयार हैं जो भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिये बनेगा और हमारी पार्टी को सम्मानजनक सीटें देगा।
2022 के चुनाव में हमारी पार्टी का गठबंधन शिवपाल यादव जी तथा अस्सूदीन ओवैसी जी की पार्टी से हुआ था किन्तु चुनाव से ठीक पहले शिवपाल जी के वापस समाजवादी पार्टी में चले जाने से गठबंधन टूट गया था। फिर भी हमारी पार्टी ने पश्चिम उत्तर प्रदेश की 5 सीटों पर चुनाव लड़ा और अच्छे वोट पाये थे।
यूजीसी के गंभीर विषय पर अपने विचार रखते हुए श्री राणा ने कहा की यह एक बड़ी साजिश है जो मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ जी को चुनाव हराने के लिए, 2027 के चुनाव से पहले लाया गया है,यह पूछने पर कि कौन है इस षडयंत्र के पीछे तो शेर सिंह राणा ने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का नाम लिया। श्री राणा ने कहा की यदि मुख्यमन्त्री-उ.प्र योगी जी तीसरी बार चुनाव जीत जायेंगे तो वह प्रधानमन्त्री बनने की रेस में सबसे आगे हो जायेंगे जो गुजरात लाॅबी नहीं चाहती है।
शेर सिंह राणा ने कहा की उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद आप देखेंगे की प्रधानमन्त्री मोदी जी मीडिया या सोशल मिडिया में प्रगट होंगे और कहेंगे की मुझसे गलती होगयी थी मैं इस कानून को वापस लेता हूं। ऐसा करके एक तो वह योगी जी को सवर्णों की नाराज़गी के माध्यम से चुनाव हरवा देगें और फिर कानून को वापस लेकर सबके अच्छे भी बन जायेंगे।
सवर्णों के साथ मोदी सरकार भेदभाव वाला व्यवहार कर रही जबकि सवर्ण तो मुख्य रूप से भाजापा का ही वोट बैंक रहा है स्थापना काल से। लगता है कि अब मोदी सरकार अन्य जातियों के वोट को पाने के लालच में अपने मूल आधार(वोट) को भूलती जा रही है,ऐसे में भाजपा को सत्ता से हटाना ही लक्ष्य है।
हमारी पार्टी “आर.जे.पी.” समान विचारधारा की राजनैतिक पार्टियों से यह आह्वान करती है कि वह भाजपा कि जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आक्रोशित जनता की पुकार को सुन एक मज़बूत गठबंधन करें और मोदी सरकार को हटाने का कार्य करें।
-रवि शंकर सिंह, संवादाता, रायबरेली
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