कल्पना कीजिए एक ऐसी रात की, जहाँ माँ सरयू के तट पर जलते लाखों दीये यह अहसास कराते हैं मानो पूरा ब्रह्मांड और आकाशगंगा स्वयं अयोध्या की पावन धरती पर उतर आए हों। इस बार का 10वां दीपोत्सव सिर्फ रोशनी का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस आशा और पुनर्जागरण की कहानी है जो अंधेरे को चीरकर हर भारतीय के दिल को गर्व से भर देती है।

त्याग और जिम्मेदारी का अमर संदेश इतिहास हमें सिखाता है कि रामराज्य केवल एक विचार नहीं, बल्कि कर्तव्य की पराकाष्ठा है। सोचिए उस समय के बारे में जब 14 वर्षों तक भरत जी ने स्वयं सुख-सुविधाएं त्यागकर प्रभु श्रीराम की पावन चरण-पादुकाओं को सिंहासन पर विराजमान किया और अयोध्या का शासन चलाया। रामायण का यह पावन प्रसंग हमें स्मरण कराता है कि असली नेतृत्व अधिकार जताने में नहीं, बल्कि अपने उत्तरदायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाने में है। आज की अयोध्या का यह दीपोत्सव उसी त्याग, मर्यादा और निस्वार्थ समर्पण के भाव को पूरी दुनिया के सामने जीवंत करता है।
रोशनी से खिलती अर्थव्यवस्था और जन-आस्था जब आस्था और जन-सहयोग एक साथ मिलते हैं, तो विकास की एक नई इबारत लिखी जाती है। उत्तर प्रदेश आज केवल एक राज्य नहीं, बल्कि ‘उत्सव प्रदेश’ के रूप में निखर चुका है। इस उजाले की एक गहरी सीख यह भी है—जहाँ प्रकाश होता है, वहाँ सुरक्षा की भावना आती है; जहाँ सुरक्षा है, वहाँ नए अवसर पनपते हैं और यही अवसर समृद्धि तथा रोजगार का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह दीपोत्सव हमारी संस्कृति के साथ-साथ हमारी अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा दे रहा है। माटी को आकार देने वाले कुम्हार, खुशबू बिखेरते फूल विक्रेता और स्थानीय छोटे व्यापारी—हर किसी के जीवन में यह पर्व आर्थिक खुशहाली और सम्मान की नई किरण लेकर आया है।
तकनीक और कला का अद्भुत संगम राम की पैड़ी पर जगमगाते मिट्टी के दीपक हों या आसमान में अद्भुत आकाशीय कलाकृतियाँ बनाते आधुनिक ड्रोन—अयोध्या आज अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिकता को गले लगा रही है। देश-विदेश से आए कलाकारों की प्रस्तुतियाँ इस समूचे वातावरण को एक अलौकिक और अविस्मरणीय भव्यता प्रदान करती हैं।
सच्ची दीपावली: हर घर पहुँचे दीये की लौ एक दीये की छोटी सी लौ हमें सिखाती है कि घना अंधेरा भी उम्मीद की एक किरण के सामने टिक नहीं सकता। इस महापर्व की सच्ची भावना तभी सार्थक होगी जब हम अपने आसपास के जरूरतमंद और वंचित परिवारों के जीवन में भी मिठास, नए वस्त्र और रोशनी बाँटेंगे। आइए, इस दीपोत्सव पर मिट्टी के दीये बनाने वाले स्थानीय कारीगरों के पसीने और मेहनत का सम्मान करें, स्वदेशी उत्पाद खरीदें और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखकर सकारात्मकता का प्रसार करें।
प्रभु श्रीराम की यह पावन नगरी आप सभी का बाहें फैलाकर स्वागत कर रही है। अपने परिवार और प्रियजनों के साथ अयोध्या पधारें और इस भव्य सांस्कृतिक गौरव के दिव्य साक्षी बनें।
सियावर रामचंद्र की जय!
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