आज के इस डिजिटल युग में, जहां इंटरनेट और सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी सामने आ रहे हैं। अक्सर युवतियों और महिलाओं को फोन कॉल्स, मैसेज या सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिए परेशान किए जाने जैसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं। ऐसे मामलों में डरने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार की ‘वूमन पावर लाइन-1090’ सेवा हर कदम पर बेटियों और महिलाओं की ढाल बनकर खड़ी है।
कैसे काम करती है यह खास सेवा?
जब भी किसी महिला को लगे कि कोई शख्स उसे अनचाहे कॉल्स से तंग कर रहा है, ऑनलाइन उसका पीछा कर रहा है या किसी भी तरह से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है, तो वह बिना किसी झिझक के 1090 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां शिकायत करने वाली का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।

अक्सर पीड़िताओं को पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ती। घर बैठे ही फोन के जरिए उनकी समस्या पर एक्शन लिया जाता है। पुलिस की टीम सीधे आरोपी से संपर्क साधती है और उसे कड़ी चेतावनी देती है कि वह अपनी इन हरकतों से बाज आ जाए। इसके अलावा, जो महिलाएं इस पूरी प्रक्रिया के दौरान तनाव या डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं, उन्हें एक्सपर्ट्स द्वारा काउंसलिंग और इमोशनल सपोर्ट भी दिया जाता है।
रोजाना हजारों कॉल्स और मामलों का समाधान
इस कॉल सेंटर की क्षमता काफी बड़ी है, जहां हर दिन हजारों की संख्या में कॉल्स हैंडल की जाती हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ जाती है। शुरुआती स्तर पर ही आरोपी को चेतावनी देकर मामले को शांत कराने की कोशिश की जाती है।
लेकिन अगर कोई सिरफिरा चेतावनी के बाद भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आता, तो 1090 एक अनोखी तकनीक का इस्तेमाल करती है, जिसे ‘एफएफआर’ (फैमिली, फ्रेंड्स एंड रिलेटिव्स) कहा जाता है। इस चरण में आरोपी के परिवार वालों, दोस्तों या रिश्तेदारों से संपर्क किया जाता है ताकि वे उसे समझा सकें। अगर इसके बावजूद बात नहीं बनती, तो मामला सीधे संबंधित थाने को ट्रांसफर कर दिया जाता है, जहां कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है।
फॉलो-अप और फीडबैक का पक्का सिस्टम
शिकायत दर्ज होने के बाद भी इस प्रक्रिया का अंत नहीं होता। पुलिस समय-समय पर पीड़िता से फीडबैक लेती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसकी परेशानी सचमुच दूर हुई है या नहीं।
नियम के मुताबिक, मामला बंद होने के पूरे 30 दिन बाद भी एक आखिरी फीडबैक लिया जाता है। यदि पीड़िता यह कहती है कि उसकी समस्या अब भी बनी हुई है या वह की गई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है, तो उस मामले पर दोबारा विचार किया जाता है और जरूरत पड़ने पर नए सिरे से मदद शुरू की जाती है। साफ है कि महिलाओं की हिफाजत के लिए यह हेल्पलाइन तभी सबसे ज्यादा असरदार साबित हो सकती है, जब त्वरित कार्रवाई हो, उनकी प्राइवेसी सुरक्षित रहे और हर मोड़ पर उन्हें सही सलाह मिल सके।

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