चुनावी हलचल तेज: 2027 के शुरुआती महीनों में हो सकता है पांच राज्यों में मतदान!

राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल काफी बढ़ गई है। भले ही विपक्षी दल एसआईआर (SIR) की कमियों को लेकर निर्वाचन आयोग पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हों, लेकिन इन सब बातों से बेफिक्र होकर आयोग ने पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। योजना के अनुसार, उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत कुल पांच राज्यों में अगले साल यानी 2027 के शुरुआती दिनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, और आयोग इनकी तैयारियों को पुख्ता करने में दिन-रात जुटा हुआ है।

मैदान में उतरीं अधिकारियों की टीमें

स्थानीय तैयारियों का जायजा लेने के लिए चुनाव आयोग ने प्रशासनिक दलों को संबंधित राज्यों में भेजना शुरू कर दिया है। इस सिलसिले में सबसे पहले उत्तराखंड के लिए टीम रवाना की जा चुकी है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, आयोग के शीर्ष पदाधिकारियों का दौरा भी 15 दिसंबर तक पूरी तरह संपन्न हो जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस तारीख के बाद देश के इन पांचों हिस्सों में चुनावी तारीखों का ऐलान किसी भी वक्त किया जा सकता है। याद दिला दें कि पिछले यानी 2022 के चुनाव में इन राज्यों के लिए चुनावी घोषणा 8 जनवरी को हुई थी।

कब तक चलेगा निरीक्षण का यह दौर?

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रशासनिक स्तर पर जमीनी तैयारियों की समीक्षा का काम 15 नवंबर तक मुकम्मल कर लिया जाएगा। इसमें से उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी चारों राज्यों का यह जायजा अक्टूबर के महीने में ही पूरा हो जाएगा। वहीं, उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक दलों का यह दौरा नवंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में तय किया गया है। इन शुरुआती दौरों के मुकम्मल होने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों का आधिकारिक दौरा शुरू होगा, जो 15 दिसंबर तक चलेगा।

ईवीएम की जांच और फुल प्रूफ सुरक्षा व्यवस्था

चुनाव की इस पूरी प्रक्रिया के बीच, इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के पहले चरण की जांच (FLC) का काम भी तेजी से शुरू कर दिया गया है।

  • पारदर्शी प्रक्रिया: जिला निर्वाचन अधिकारी की सीधी निगरानी में और पंजीकृत राजनीतिक दलों के नुमाइंदों की मौजूदगी में यह तकनीकी जांच पूरी की जाती है। इसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) के अधिकृत इंजीनियर हिस्सा लेते हैं।
  • सुरक्षा और सीसीटीवी कवरेज: इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले सभी संबंधित दलों को सूचित किया जाता है। वेयरहाउस खोलने से लेकर इंजीनियरों के प्रवेश तक कड़े सुरक्षा पहरे के बीच सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि की रिकॉर्डिंग की जाती है।
  • बारीक तकनीकी मुआयना: विशेषज्ञ इंजीनियर कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट (VVPAT) के हर एक हिस्से की सूक्ष्म जांच करते हैं ताकि यह पक्का किया जा सके कि सभी उपकरण पूरी तरह असली और सुरक्षित हैं। इसके बाद मशीनों की सफाई करके उनकी पुरानी बैटरियों को नई मूल बैटरियों से बदल दिया जाता है।
  • मॉक पोल और स्ट्रॉन्ग रूम: हर एक मशीन पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सामने डमी मतदान (मॉक पोल) करवाकर उनकी कार्यक्षमता परखी जाती है। जो मशीनें कसौटी पर खरी उतरती हैं, उन पर हरी पर्ची (ग्रीन स्लिप) लगाकर उन्हें सुरक्षित रूप से स्ट्रॉन्ग रूम में शिफ्ट कर दिया जाता है।

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