सोचिए, दफ्तर छूटने का समय हो या बाहर तेज बारिश हो रही हो, और आपको टैक्सी का किराया दो से तीन गुना न देना पड़े! वहीं दूसरी तरफ, दिन-रात स्टेयरिंग संभालने वाले ड्राइवर की मेहनत की कमाई से कोई प्लेटफॉर्म कमीशन के नाम पर कटौती न करे! उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए यह सुखद बदलाव अब बहुत जल्द हकीकत बनने जा रहा है। लखनऊ और कानपुर में प्रयोग के तौर पर शुरू हुए ‘भारत टैक्सी’ मॉडल को अब पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने की तैयारी है।

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल एक ऐप नहीं, बल्कि एक सहकारी (Cooperative) आंदोलन की तरह काम करेगी। अक्सर देखा जाता है कि भीड़भाड़ वाले मौकों पर कंपनियां किराया बढ़ा (Surge Pricing) देती हैं, लेकिन इस मॉडल में ‘नो-सर्ज प्राइसिंग’ का नियम तय किया गया है। यानी समय चाहे जो हो या मांग कितनी भी ज्यादा हो, यात्रियों से वाजिब किराया ही लिया जाएगा। इसके साथ ही, ऑटो, बाइक और कैब—तीनों सुविधाएं एक ही नेटवर्क पर उपलब्ध होंगी।
बात अगर गाड़ी चलाने वाले ‘सारथियों’ की करें, तो उनके लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें ‘जीरो कमीशन’ का फॉर्मूला रखा गया है। चालकों को किसी प्राइवेट कंपनी का एजेंट बनाने के बजाय इस सहकारी मॉडल में सीधे कारोबारी हिस्सेदार बनाया जाएगा। इससे हर यात्रा पर होने वाली कमाई का पूरा फायदा सीधे चालक को मिलेगा और उनकी आमदनी में सुधार होगा।
इतना ही नहीं, इस योजना का दायरा सिर्फ बड़े शहरों की चमचमाती सड़कों तक सीमित नहीं रहने वाला। राज्य सरकार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल करके इसे प्रदेश के दूर-दराज के गांवों तक पहुंचा रही है। अब ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अस्पताल जाना हो, रेलवे स्टेशन पहुंचना हो या जिला मुख्यालय के चक्कर काटने हों, उन्हें आसानी से स्थानीय सवारी मिल जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस दूरदर्शी कदम से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के ढेरों नए रास्ते भी खुलेंगे। सरकार जल्द ही इस जन-हितैषी परिवहन सेवा को आधिकारिक रूप से पूरे प्रदेश में शुरू करने जा रही है।
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