ऊंचाहार : उमस और 24 घंटे में महज 5 से 6 घंटे की नाममात्र सप्लाई—यह आज ऊंचाहार के गांवों की दर्दनाक जमीनी हकीकत बन चुकी है। एक तरफ जहां बच्चे अपनी छमाही और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ लगातार गुल रहती बिजली उनकी पढ़ाई और सेहत दोनों पर भारी पड़ रही है। जनता की इसी बेहाली को नजदीक से महसूस करने और उनकी आवाज बुलंद करने के लिए कांग्रेस के प्रदेश सचिव व पूर्व प्रत्याशी अतुल सिंह खुद सड़कों पर उतरे।

अतुल सिंह ने विधानसभा ऊंचाहार के जुड़वन सिंह का पुरवा, ब्रजनगर, सुरसना, पिपरी, जलालाबाद, भरसना, कंधरपुर, सराय लखनी और कुटिया चौराहा समेत दर्जनों इलाकों का सघन दौरा किया। उन्होंने चौपालों में सीधे ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिया कि मूलभूत सुविधाओं से महरूम जनता के अधिकारों की लड़ाई हर स्तर पर लड़ी जाएगी।

संवाद के दौरान क्षेत्र के किसानों का दर्द भी खुलकर सामने आया। अतुल सिंह ने कहा कि आज काश्तकार दोहरी मार झेल रहे हैं—एक तरफ फसलों के लिए जरूरी डीएपी खाद की भारी किल्लत है, तो दूसरी तरफ दिन-रात मेहनत से उगाई गई फसल को आवारा मवेशी तबाह कर रहे हैं। गांवों की बुनियादी संरचना का आलम यह है कि टूटी-फूटी सड़कों के कारण बारिश का पानी लोगों के घरों के भीतर तक भर रहा है, लेकिन शासन-प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

सत्ताधारी व्यवस्था और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा, “क्षेत्र की जनता त्राहि-त्राहि कर रही है और स्थानीय विधायक केवल अपनी आवभगत और स्वागत-सत्कार में व्यस्त हैं। ऊंचाहार की धरती पर मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री दोनों के कदम पड़े, लेकिन अफसोस कि न तो इलाके के विकास पर कोई रोडमैप रखा गया और न ही चरमराई बिजली व्यवस्था को ठीक करने की कोई चर्चा हुई।”

देश के मौजूदा आर्थिक हालात और बढ़ती महंगाई पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आज ₹75 किलो बिक रही चीनी, दाल और दूध जैसी बुनियादी चीजें आम परिवार की थाली से दूर होती जा रही हैं। ऐसे कठिन समय में देश के लोकतंत्र और आम आदमी के हितों के लिए यदि कोई सड़क पर संघर्ष कर रहा है, तो वे जननायक राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हैं।

इस जनसंपर्क अभियान के दौरान अजय सिंह (जिला सचिव), गजेंद्र सिंह, रंजीत कुमार, संदीप मौर्य, गया शुक्ला ‘मुन्ना’, राहुल राज, अजय कुमार, कमला प्रसाद, रामस्वरूप मौर्य, मुकेश मौर्य, मोहनलाल सरोज, मुखिया सरोज, हिमांशु मौर्य, नीरज सिंह, संतोष सोनकर, अवधेश सिंह, विनय सविता, सुभाष यादव, नीरज सोनकर, रवि सिंह, सुशील सरोज, अवधेश यादव, राम अवध प्रजापति, गंगाराम गौतम, अमरजीत सिंह, प्रेम पटेल, बचोले प्रसाद, उमेश मौर्य, अमरनाथ सरोज, शिवम पटेल और छोटेलाल पाल सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिक व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
-रवि शंकर सिंह, संवादाता, रायबरेली
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